झांसी। कोविड से ठीक हो चुके लोगों का प्लाज्मा इस महामारी से लड़ाई में बड़ा हथियार है। ऐसे में रिपोर्ट पॉजिटिव आने के 28 दिन बाद या फिर रिपोर्ट निगेटिव आने के 14 दिन बाद व्यक्ति अपना प्लाज्मा डोनेट कर सकता है। एक बार प्लाज्मा दान कर कोरोना के दो रोगियों की जान बचाई जा सकती है।
कोरोना की अब तक वैक्सीन बाजार में नहीं आई है। इस बीमारी के उपचार के लिए तमाम प्रयास किए गए, जिसमें प्लाज्मा थेरेपी के काफी सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। थेरेपी में कोविड से ठीक हो चुके व्यक्ति का प्लाज्मा मरीज को चढ़ाया जा सकता है। ऐसे में मेडिकल कॉलेज की ब्लड बैंक में इसकी उपलब्धता होनी जरूरी है। मौजूदा समय में सिर्फ तीन लोग ही प्लाज्मा डोनेट करने के लिए आए हैं। जबकि, अभी भी 15 से अधिक रोगी मेडिकल कॉलेज के कोविड अस्पताल में जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष कर रहे हैं। इन्हें कभी भी प्लाज्मा की जरूरत पड़ सकती है। अमर उजाला सभी कोरोना को मात देने वाले व्यक्तियों से अपील करता है कि यह महामारी अब किसी और की जान न ले ले, इसके लिए प्लाज्मा दान करने के लिए आगे आएं। आपका एक प्लाज्मा दो लोगों की जान बचा सकता है।
एक साल तक किया जा सकता उपयोग
प्लाज्मा को मेडिकल कॉलेज की मशीन में माइनस 40 डिग्री सेल्सियस पर रखते हैं। यह पूरी तरह जम जाता है। इसलिए एक साल तक प्लाज्मा का उपयोग कर सकते हैं। प्लाज्मा निकालने की तरीके को प्लाज्मा थैरेसिस कहते हैं।
ये भी जानें
- प्लाज्मा दान करने के बाद कोई कमजोरी नहीं आती है।
- यह सिर्फ रक्त का एक कंपोनेंट है। इससे खून की कमी नहीं होती है।
- डोनेट नहीं करेंगे तो एंटीबॉडी कुछ समय बाद अपने आप खत्म हो जाएगी।