झांसी। कोरोना को मात देने के बाद भी लोगों में इस बीमारी का खौफ खत्म नहीं हुआ है। स्वास्थ्य से संबंधित जरा सी तकलीफ होने पर लोग घबरा जाते हैं। कोई पल्स ऑक्सीमीटर से ऑक्सीजन लेवल जांचने लगता है तो कोई मशीन से ब्लड प्रेशर। वहीं, कोरोना मुक्त होने के बाद भी कइयों को शरीर में दर्द बना हुआ है तो कइयों को कमजोरी है।
झांसी में कोरोना के अब तक 6400 से भी अधिक मरीज मिल चुके हैं। इनमें से 81 फीसदी से ज्यादा लोग स्वस्थ होकर अपने घर लौट चुके हैं। मगर कोरोना को मात दे चुके कई लोगों में इस बीमारी का डर पूरी तरह नहीं निकल सका है। अस्पताल में बीमारी के साये में गुजारे हुए एक-एक दिन इसी डर में कटते रहे कि कहीं कोई बड़ी समस्या न हो जाए। दस दिनों तक भर्ती रहने के बाद जब डिस्चार्ज हुए तो राहत की सांस जरूर ली लेकिन जैसे ही खांसी, जुकाम या हल्का बुखार हुआ तो फिर इस बात को खौफ सताने लगा कि कहीं दोबारा कोरोना तो नहीं हो गया। दवाओं के बाद जब तकलीफ दूर तो हो गई लेकिन बार-बार मशीनों से ऑक्सीजन लेवल, ब्लड प्रेशर, बुखार की जांच करने की आदत बन गई। अभी भी कोरोना को मात दे चुके कई लोग ऐसे हैं, जिनकी कमजोरी दूर नहीं हुई है। कुछ को शरीर में दर्द बना हुआ है।
केस-1
जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. डीएस गुप्ता भी कोरोना पॉजिटिव हो गए थे। उन्हें सांस लेने में तकलीफ होने पर मेडिकल कॉलेज में भर्ती किया गया। सात दिन तक भर्ती रहने के बाद उन्हें डिस्चार्ज कर दिया गया। उनकी एंटीजन जांच भी हुई, जिसकी रिपोर्ट निगेटिव आई। घर पहुंचने के दो-तीन दिन बाद उन्हें खांसी उठनी शुरू हो गई। चूंकि, वह खुद वरिष्ठ चिकित्सक हैं, इसलिए उन्होंने एचआर-सीटी की जांच कराई। रिपोर्ट में कुछ गड़बड़ी सामने आई। इसके बाद उन्हें दोबारा मेडिकल कॉलेज में भर्ती होना पड़ा। यहां पर रेमडेसिविर इंजेक्शन आदि लगाए गए। तब स्थिति सुधरी।
केस-2
मिशन कंपाउंड निवासी प्रदीप कुमार को कोरोना से ठीक हुए दो महीना होने को है। दस दिन उन्होंने अस्पताल में गुजारे। एक बड़े हॉल में इतना समय गुजारना बड़ा मुश्किल भरा रहा। उन्होंने बताया कि बीमारी से स्वस्थ होने के बाद एक बार खांसी, जुकाम हो गया। इसके साथ ही सांस लेने में भी तकलीफ महसूस होने लगी। उन्होंने ऑक्सीजन लेवल, ब्लड प्रेशर और बुखार सब जांच लिया। सबकुछ नॉर्मल था। एक-दो दिन में खांसी, जुकाम भी ठीक हो गया। हालांकि, दिमाग में बीमारी इस कदर घर कर गई है कि अभी भी ऑक्सीजन, बीपी और बुखार की जांच करता रहता हूं।
केस-3
नर्सिंगराव टौरिया निवासी गोपाल जी अग्रवाल ने बताया कि वह 17 अगस्त को कोरोना पॉजिटिव हुए थे। 28 अगस्त को मेडिकल कॉलेज से डिस्चार्ज हो गए। अभी भी उनके पैरों में हल्का दर्द बना रहता है। अस्पताल से डिस्चार्ज होने के बाद जब पहली बार जुकाम हुआ तो घबराहट हो गई कि कहीं दोबारा बीमारी तो नहीं हो गई। हालांकि, गर्म पानी पीया तो सबकुछ ठीक हो गया। अब जीवनशैली में गर्म पानी का नियमित सेवन करना और भाप लेना शामिल कर लिया है। उन्होंने बताया कि इस बीमारी से मजबूत रहकर ही लड़ सकते हैं। इसलिए संक्रमित होने के बाद घबराएं नहीं।
कोरोना से ठीक होने के 14 दिन बाद यदि किसी मरीज में कोविड के लक्षण दिखाई देते हैं, तो वह दोबारा आरटी-पीसीआर जांच करा सकता है। जांच से स्थिति स्पष्ट हो जाती है। वहीं, खांसी, जुकाम और बुखार का एक कारण वायरल भी हो सकता है। ऐसे में लोगों को घबराने के बजाए जांच कराकर स्थिति स्पष्ट कर लेनी चाहिए। यदि कोई दोबारा पॉजिटिव मिलता है तो नए मरीज की तरह उसका फिर से उपचार शुरू होगा। हालांकि, झांसी में अभी तक कोई भी ऐसा केस सामने नहीं आया है, जो एक बार ठीक होने के बाद दोबारा कोरोना पॉजिटिव हुआ हो। - डॉ. एनएस सेंगर, उप प्राचार्य, मेडिकल कॉलेज झांसी।