जिले में 30 हजार बच्चे गंभीर बीमारियों का शिकार हैं। इनमें सर्वाधिक बच्चे कुपोषण के शिकार हैं। बाकी, हृदय, निमोनिया, मधुमेह और ब्लड कैंसर समेत कई गंभीर बीमारियों से पीड़ित हैं। इन बीमारियों के शिकार बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होती है। ऐसे में इनके लिए कोरोना की तीसरी लहर दिक्कत पैदा कर सकती है। इसलिए बाल रोग विशेषज्ञ इनके खानपान, व्यायाम और नियमित दवाएं चलाने पर विशेष जोर दे रहे हैं।
झांसी समेत प्रदेश भर में कुपोषण एक बड़ी समस्या है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2020 में शून्य से पांच साल तक के अल्प वजन वाले 14369 बच्चे चिह्नित किए गए। जबकि, गंभीर अल्प वजन वाले 4208 बच्चे चिह्नित किए गए।
मेडिकल कॉलेज में पिछले पांच सालों में लिवर, मधुमेह, हृदय, निमोनिया, ब्लड कैंसर, नेफ्रोटिक सिंड्रोम, इम्यूनो डेफिसिएंसी डिस्ऑडर समेत कई गंभीर बीमारियों का शिकार सात हजार बच्चे इलाज कराने के लिए आए। जबकि, अन्य सरकारी अस्पतालों और नर्सिंगहोमों में भी इसी के आसपास मरीज पहुंचे। कुल मिलाकर जिले में लगभग 30 हजार बच्चे गंभीर बीमारियों की चपेट में हैं।
मेडिकल कॉलेज में इतने बच्चों का हुआ इलाज
बीमारी रोगी
लिवर 100
मधुमेह 250
हृदय 3100
निमोनिया 3000
ब्लड कैंसर 50
नेफ्रोटिक सिंड्रोम 400
इम्यूनो डेफिसिएंसी डिस्ऑर्डर 50
(नोट: ये आंकड़े पिछले पांच सालों में आए शून्य से 18 साल तक साल तक के बच्चों के हैं।)
मेडिकल कॉलेज में पिछले पांच सालों में सबसे ज्यादा हृदय रोग और निमोनिया का शिकार बच्चे आए हैं। कोरोना काल में मोबाइल, टीवी, कंप्यूटर पर ही बच्चों का ज्यादातर समय बीत रहा है। यह ठीक नहीं है। बच्चों की फिजिकल एक्टिविटी ज्यादा होनी चाहिए। इसके अलावा फास्ट फूड की जगह हरी सब्जियों से युक्त खाना ज्यादा खिलाएं। इससे ही बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत होगी। वह बीमारियों से बच सकेंगे।
- डॉ. ओमशंकर चौरसिया, बाल रोग विभागाध्यक्ष, मेडिकल कॉलेज।
विभिन्न बीमारियों से ग्रसित बच्चों का इलाज प्रभावित न होने दें। इसके अलावा सभी बच्चों को खाने की अच्छी डाइट दें, साथ ही नियमित व्यायाम कराएं। इससे बच्चे का शरीर मजबूत होगा। कोविड की वजह से स्कूल और घर से बाहर खेलना भी बंद है। इसलिए बच्चों में मोटापा काफी बढ़ गया है। मोटापा कई बीमारियों का कारण बन जाता है। इसलिए इसे भी कम करें। दो साल से बड़े बच्चों को घरों से बाहर निकलने पर मास्क पहनाएं। -
डॉ. अनुज सेठी, असिस्टेंट प्रोफेसर, मेडिकल कॉलेज।
इस तरह करें बच्चे की माप
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उम्र वजन लंबाई
जन्म पर 3 50
तीन माह 5 60
छह माह 7 66
नौ माह 9 71
एक साल 10 75
दो साल 12 87
तीन साल 14 94
चार साल 16 100
पांच साल 18 106
छह साल 20 112
सात साल 23 118
आठ साल 26 124
नौ साल 29 130
10 साल 32 136
11 साल 35 142
12 साल 38 150
(नोट- वजन किलो में और लंबाई सेंटीमीटर में)