झांसी। जिले में बेकाबू हो चुके कोरोना वायरस की वजह से महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज के आईसीयू में बेड और वेंटिलेटर फुल चल रहे हैं। अब छठवां आईसीयू मरीजों के लिए खोलना पड़ गया है। ऐसे में कई गंभीर मरीजों को झांसी से लगभग 450 किलोमीटर दूर दिल्ली की दौड़ लगानी पड़ रही है। वहीं, झांसी के नर्सिंगहोमों ने अब तक कोविड मरीजों का इलाज करना शुरू नहीं किया है।
झांसी में कोरोना की दस्तक हुए साढ़े तीन महीने हो चुके हैं। जैसे-जैसे समय बीतता जा रहा है, वैसे-वैसे बेकाबू कोरोना के आगे सारे संसाधन बौने साबित हो रहे हैं। सितंबर महीने की शुरुआत होने के बाद से कोरोना से हालत और बिगड़ गए हैं। पिछले चार दिनों से लगातार 100 से ऊपर केस आ रहे हैं। इनमें गंभीर मरीजों की संख्या काफी अधिक है। इस कारण मेडिकल कॉलेज में पांच आईसीयू मरीजों से पूरी तरह भर गए हैं। अब छठवां आईसीयू खोलना पड़ गया है। यही नहीं, वेंटिलेटर भी
लगभग पूरी तरह मरीजों से भरे पड़े हैं। इन हालातों में कई लोग अपने मरीजों को दिल्ली ले जा रहे हैं। जबकि, झांसी में कई बड़े अस्पताल हैं, जहां पर कोरोना के मरीजों को उपचार शुरू किया जा सकता है। निजी अस्पतालों में कोविड मरीजों को भर्ती कर इलाज शुरू करने के लिए प्रशासन के अधिकारियों के साथ बैठक हुई। अधिकारियों ने बैठक में बड़ी-बड़ी बातें भी कीं लेकिन नतीजा कुछ नहीं निकला।
20 लाख की आबादी पर सिर्फ 76 वेंटिलेटर
झांसी में 20 लाख की आबादी है और सरकारी, निजी अस्पतालों को मिलाकर सिर्फ 76 वेंटिलेटर हैं। इसमें मेडिकल कॉलेज में 37 और जिला अस्पताल में पांच वेंटिलेटर हैं। इसके अलावा नर्सिंगहोमों को मिलाकर 33 वेंटिलेटर हैं।
एल-1 इकाई के तौर पर चार नर्सिंगहोमों का चयन हुआ है लेकिन अब तक स्वास्थ्य विभाग की तरफ से किसी मरीज को वहां नहीं भेजा गया है। वहीं, नर्सिंगहोमों में कोविड मरीजों को भर्ती करने के पहले इस बीमारी के उपचार के लिए स्टाफ का प्रशिक्षित होना भी जरूरी है। पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था भी होनी चाहिए। इसके अलावा भी कई बिंदु हैं, जिसे पूरा करना चाहिए। - निलय जैन, सचिव, नर्सिंगहोम एसोसिएशन।
इंडियन मेडिकल एसोसिएशन की तरफ से कोविड मरीजों का इलाज करने के संबंध में नर्सिंगहोम संचालकों से बात की गई है। अभी कोई भी प्राइवेट अस्पताल इसके लिए राजी नहीं हुआ है। आईएमए अस्पतालों से बात कर सुझाव ही दे सकती है। किसी भी नर्सिंगहोम पर एसोसिएशन दबाव बनाकर राजी नहीं कर सकती है। नर्सिंगहोमों से आगे भी बात करते रहेंगे। - डॉ. बीके गुप्ता, कार्यवाहक अध्यक्ष, आईएमए।