झांसी। कोरोना महामारी ने लोगों की आर्थिक सेहत पर गहरा असर डाला है। जिन बचत योजनाओं के जरिए 2008 की वैश्विक मंदी को मात दी गई थी उस बचत योजना की दीवार इस महामारी में दरकती दिखती है। झांसी में डाकघरों से संचालित होने वाली तमाम बचत योजनाओं से इस दफे पैसे की निकासी पिछली दफे के मुकाबले अभी तक अधिक हुई। लॉकडाउन से अगस्त माह के बीच 214.97 करोड़ रुपये जमाकर्ताओं ने निकाल लिए। यह आंकड़ा पिछली दफे के मुकाबले अधिक है।
डाकघर के जरिए संचालित होने वाली योजनाओं के जरिए बड़े पैमाने पर पैसे जमा किए जाते हैं। इनमें पांच वर्षीय आवर्ती जमा योजना, पांच वर्षीय डाकघर मासिक आय योजना, वरिष्ठ नागरिक बचत योजना, किसान विकास पत्र, पांच वर्षीय राष्ट्रीय बचत पत्र, एक से पांच वर्षीय सावधि जमा योजनाएं, 15 वर्षीय लोक भविष्य निधि खाता एवं सुकन्या समृद्घि योजना लोगों के बीच सर्वाधिक लोकप्रिय हैं। झांसी में एक लाख से अधिक छोटे-बड़े खातेधारक हैं। अभी तक इन योजनाओं की अवधि पूरी होने के बाद जमाकर्ता पैसा न निकालकर अमूमन उसी में फिर पैसा जमा करते थे लेकिन, इस दफे कोराना के चलते पैदा हुई परिस्थितियों में लोगों ने पैसा बाहर निकालने को अधिक तरजीह दिया। आंकड़ों के मुताबिक लॉकडाउन की
शुरूआत के बाद अप्रैल माह में 27 करोड़ रुपये निकाले गए जबकि 12.51 करोड़ रुपये जमा हुए। इसी तरह मई माह में 41.19 करोड़ रुपये की निकासी हुई जबकि 18.22 करोड़ रुपये ही लोगों ने जमा किए। जून माह में 28.57 करोड़ जमा हुए जबकि 55.11 करोड़ रुपये निकाल लिए गए। जुलाई में 34.61 करोड़ जमा किए गए वहीं, 42.64 करोड़ रुपये जमाकर्ताओं ने बचत योजनाओं से बाहर निकाल लिए। अगस्त माह में भी 47.63 करोड़ रुपये लोगों ने निकाले जबकि 27.21 करोड़ रुपये ही जमा योजनाओं में जमा हुआ। हालांकि जमा योजनाओं से जुड़े अफसर अधिक निकासी से इंकार करते हैं। प्रभारी सहायक निदेशक बचत अरविंद गौड़ का कहना है कि शासन से जमा कराने का लक्ष्य झांसी ने पहले ही पूरा कर लिया।
पिछले वर्ष के मुताबिक निकासी के आकड़े
करोड़ में
2019 2020
मई 33.82 42.19
जून 38.82 55.11
जुलाई 44.54 42.64
अगस्त 39.89 47.63