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पिता के शव को श्मशान तक पहुंचाने के लिए बेटे को बुलाने पड़ गए चार मजदूर

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corona afraid : son call four labour in father cremation
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विकास सनाड्य
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झांसी। कोरोना वायरस के संक्रमणकाल की इससे बड़ी त्रासदी और क्या हो सकती है कि एक बेटेे को अपने पिता के शव को श्मशान घाट तक ले जाने के लिए चार मजदूरों का सहारा लेना पड़ा। जब कोई पड़ोसी और रिश्तेदार नहीं आया तो उसने कदम उठाया। दरअसल मृतक के कोरोना पॉजिटिव होने की आशंका के चलते मुहल्ले वालों से लेकर रिश्तेदार तक अंतिम क्रिया से किनारा कर गए थे।
महानगर की पुरानी बस्ती के एक घनी आबादी वाले मुहल्ले में रहने वाले एक लगभग सत्तर वर्षीय व्यक्ति की शुक्रवार की सुबह मौत हो गई। वो पिछले चार - पांच दिनों से बीमार चल रहे थे। मृतक के घर के पास ही पिछले दिनों दो कोरोना पॉजिटिव केस पाए गए थे, जिसके चलते शुक्रवार की शाम आसपास के तमाम लोगों के स्वास्थ्य विभाग की टीम ने कोरोना सैंपल लिए थे। इसमें इस वृद्ध का भी सैंपल लिया गया था। लेकिन, रिपोर्ट आने से पहले ही वृद्ध की मौत हो गई। वृद्ध के पुत्र ने इसकी सूचना रिश्तेदारों व आसपास के लोगों को दी। लेकिन, कोई आगे नहीं आया। सभी को आशंका थी कि वृृद्ध की मौत कोरोना वायरस के संक्रमण से हुई है तथा अंतिम यात्रा में शामिल होने पर वे भी इस महामारी की गिरफ्त में आ सकते हैं। आखिरकार पिता के शव को शमशान घाट तक पहुंचाने के लिए पुत्र को चार मजदूरों का सहारा लेना पड़ा। हालांकि, बाद में पुत्र के कुछ दोस्त व कुछ रिश्तेदार भी पहुंच गए। लेकिन, सब दूर रहकर मृतक के पुत्र को ढांढस बंधाते रहे। मुक्तिधाम में मजदूरों ने चिता बनाई और उस पर शव को रखा। पुत्र ने मुखाग्नि दी।
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यह घटना दिन भर महानगर में चर्चा के केंद्र में बनी रही। जिसने भी सुनी, उसकी आंखें नम हो उठीं।
मजदूरों का रखा ख्याल, पहनाई पीपीई किट
झांसी। शव के अंतिम संस्कार के लिए बुलाए गए चार मजदूरों का पूरा ख्याल रखा गया है। पहले उन्हें पीपीई किट पहनाई गई। उसके बाद उन्हें शव के पास जाने दिया गया। शव के अंतिम संस्कार के बाद मजदूरों को पहनाई गईं पीपीई किट मुक्तिधाम में ही जला दी गईं। जबकि, पुत्र ने बगैर पीपीई किट के ही पिता को मुखाग्नि दी।
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महामारी ने तोड़ दीं सदियों पुरानी परंपराएं
झांसी। कोरोना संक्रमणकाल में सदियों से चली आ रहीं परंपराएं टूट गईं हैं। रिश्ते-नाते भी मजबूर हो चले हैं। जी हां, यह पहला मामला नहीं है जब किसी शव के अंतिम संस्कार के लिए बेगानों का सहारा लेना पड़ा। हाल ही में 59 वर्षीय व्यक्ति की मौत के बाद प्रशासन ने शव का अंतिम संस्कार कराया। जबकि, एक पूर्व अध्यापक की मौत के बाद पुलिस ने उनके शव का अंतिम संस्कार किया था। परिजन और रिश्तेदार होने के बाद भी बेगाने हाथों ने शव को मुखाग्नि दी थी।
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