झांसी। लॉकडाउन के बाद से मुस्लिम समाज की शादियां भी सीमित दायरे में होने के कारण कोरमा, बिरयानी व कबाब का स्वाद भी गायब हो चुका है। मीट के लजीज व्यंजन न बनने से मीट कारोबारियों को भी तगड़ा झटका लगा है। कार्यक्रम में बरात व वलीमा न होने से उन्हें लाखों लाखों रुपये का नुकसान भी झेलना पड़ रहा है।
मुस्लिम समाज में शादियों के दौरान कई किस्म के बनने वाले मीट के पकवानों की भरमार रहती थी। इनमें कोरमा, बिरयानी, कबाब, स्टू समेत कई तरह के व्यंजन के स्टॉल नजर आते थे, लेकिन लॉकडाउन के बाद से ही शादियां न होने से लोग इसके स्वाद से महरूम हैं। लॉकडाउन के बीच शादी की परमिशन भी मिलने लगीं, लेकिन लोगों की सीमित संख्या होेने के कारण दावतों का दौर परवान नहीं चढ़ सका।
अब मुस्लिम समाज के लोग सीमित संख्या में ही निकाह व वलीमा कर रहे हैं। जिस कारण दावतें न होने से मीट कारोबारियों को भी तगड़ा झटका लगा है। मीट कारोबारियों के मुताबिक मीट की बिक्री शुरू होने के बाद भी कारोबार में उछाल नहीं आ सका। सामान्य दिनों के मुकाबले कारोबार लगभग आधे से भी कम रह गया। आमतौर पर सामान्य दिनों में लगभग लाखों रुपये का प्रतिदिन मीट का कारोबार होता है।
मीट के दाम भी बढ़े
मटन - 500 रुपये से 650 रुपये
चिकिन - 150 रुपये से 280 रुपये
मछली - 100 रुपये से लेकर 150 रुपये
लॉकडाउन के बाद से ही मीट की बिक्री में उछाल नहीं आ सका। अब शादियां न होने से किसी तरह के बड़े ऑर्डर न मिलने से दिन प्रतिदिन मीट कारोबारियों को भारी नुकसान हो रहा है।
खुर्शीद कुरैशी, मीट कारोबारी
मीट से जुड़ा पूरा कारोबारी पूरी तरह सुस्त है। एक तरफ जहां शादियां नहीं हो रहीं तो वहीं होटल भी न खुलने से कारोबार में उछाल नहीं आ रहा है। आगे भी भरपाई का कोई रास्ता नजर नहीं आ रहा है।
शकील कुरैशी, मीट कारोबारी