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तीस करोड़ के टेंडर के लिए ठेकेदारों न किया था अफसरों से गठजोड़

Fri, 27 Dec 2019 03:56 AM IST
झांसी ब्यूरो अमर उजाला ब्यूरो, झांसी
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लघु सिंचाई विभाग में पूल बनाकर 30 करोड़ के टेंडर हासिल करने को अफसरों और ठेकेदारों ने गठजोड़ बना लिया था। डीएम द्वारा कराई गई जांच में इसका खुलासा हुआ है। इस मामले में डीएम ने विभाग के अधिशासी अभियंता, दो अवर अभियंता, एक लिपिक के खिलाफ कार्रवाई की संस्तुति करते हुए अपनी रिपोर्ट शासन को भेज दी है।

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पूल बनाकर करोड़ों के टेंडर हासिल करने का मामला 22 नवंबर को उजागर होने के बाद सभी निविदाएं निरस्त कर दीं गईं थीं। जिलाधिकारी शिवसहाय अवस्थी ने मामले की जांच मुख्य विकास अधिकारी को सौंपी थी। पिछले दिनों सीडीओ ने जांच कर 250 पेज की रिपोर्ट डीएम को सौंप दी थी।

रिपोर्ट के आधार पर बृहस्पतिवार को डीएम ने टेंडर पूलिंग में संलिप्तता पाए जाने पर लघु सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता मोहन प्रकाश पासवान, अवर अभियंता राजीव कुमार चौधरी व रवींद्र यादव तथा लेखा लिपिक प्रदीप कुमार अस्थाना के निलंबन व विभागीय कार्रवाई की संस्तुति की है। इसके अलावा इस खेल में शामिल तीन दर्जन ठेकेदारों को भी काली सूची में डाले जाने की संस्तुति की गई है।
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जिले में 30 करोड़ रुपये की लागत से 39 चेकडैम बनाए जाने हैं तथा 40 तालाबों को गहरा किया जाना है। ये काम लघु सिंचाई विभाग के माध्यम से होने हैं। विभाग ने नवंबर माह में इसके लिए ठेकेदारों से ऑनलाइन निविदाएं मांगी थीं। इसके साथ ही खेल शुरू हो गया था। ठेकेदारों के बीच काम को लेकर प्रतिस्पर्धा न हो, इसके लिए विभाग के उक्त लोग सक्रिय हो गए थे।

उन्होंने पूल बनाकर तय कर दिया था कि किस काम के लिए कौन ठेकेदार टेंडर डालेगा। इस तरह से सभी कामों के ठेकेदार तय कर दिए गए थे। इसमें करोड़ों रुपये का बंदरबांट होना था। लेकिन, इससे पहले ही मामला उजागर हो गया। डीएम ने निविदाएं निरस्त करते हुए जांच बैठा दी।

नगर निगम में भी पूल कर लिए चौदह करोड़ के टेंडर
नगर निगम में कुछ दिनों पहले ही बड़े ठेकेदार एवं अभियंताओं की मिलीभगत से करीब चौदह करोड़ रुपये के ठेकों के पूल होने का मामला सामने आया था। निगम के आधा दर्जन रसूखदार ठेकेदारों ने निगम अभियंताओं की मदद से ईं-टेंडरिंग व्यवस्था में सेंधमारी करते हुए चौदह करोड़ के काम आपस में बांट लिए। इसका खुलासा इन टेंडरों के टेकिभनकल बिड खुलने पर हुआ।

मालूम चला कि ठेकेदारों ने सिर्फ दो-तीन फीसदी बिलो रेट ही कोट किया। निगम अभियंताओं ने भी उनकी भरपूर मदद की। बड़े ठेकों में प्रतिस्पर्धा रोकने के लिए 24 नवंबर को 40 कार्यों की निविदाएं डलवाईं गईं लेकिन उसे समय पर नहीं खोला गया। इससे तमाम ठेकेदारों की एफडीआर उसी में फंसी रह गई। वह बड़े टेंडर में हिस्सा नहीं ले सके। तमाम गड़बड़ियों के चलते ही यह निविदाएं अभी तक नहीं खोली जा सकी हैं।

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