बीयू में निर्मल गंगा पर कार्यक्रम प्रस्तुत करते छात्र-छात्राएं।
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झांसी। अविरल गंगा के समापन पर बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. जेवी वैशम्पायन ने कहा कि शासन के अनुसार यह यात्रा आज समाप्त हो रही है लेकिन जब तक गंगा सहित सभी जल स्त्रोत साफ नहीं हो जाते, हमें लगातार प्रयास करते रहना चाहिए।
कुलपति ने कहा कि जल के बिना जीवन संभव नहीं है। उन्होंने स्वयंसेवकों द्वारा गंगा की दुर्दशा पर प्रस्तुत नाटक ‘नमामि गंगे’ की प्रशंसा करते हुए कहा कि आज गंगा पूर्णत: गंदी हो चुकी है। हमें इसे पुन: देवी के रुप में स्थापित करने के लिए बहुत प्रयास करने की आवश्यकता है। इस नाटक को देश के अन्य विश्वविद्यालयों तथा महाविद्यालयों में भी दिखाया जाना चाहिए, जिससे गंगा की वास्तविक स्थिति और दर्द लोगों के समझ आ सके। इस दौरान डॉ. दीप्ति भदौरिया, डॉ. अनिल कुमार दुबे, डॉ. प्रणव त्रिपाठी, डॉ. नरेंद्र कुमार पाठक, डॉ. जितेंद्र बबेले, दिलीप कुमार, जयराम कुटार, आरती वर्मा, संजीव वर्मा, मुकुल वर्मा उपस्थित रहे।