झांसी। अब युवाओं की भी किडनी खराब हो रही है। शुरुआत में कभी-कभी सिर दर्द या पैरों में हल्की सूजन आती है। उल्टी-दस्त को नजरअंदाज करने से भी किडनी को नुकसान होता है। इसके अलावा, चटक नमक खाने, कम पानी पीने आदि से भी किडनी खराब हो रही है। मेडिकल कॉलेज की नेफ्रोलॉजी ओपीडी में औसतन 25 नए रोगी रोजाना आ रहे हैं, जिनमें तीन युवा होते हैं। यही नहीं, हर माह 250 रोगियों की डायलिसिस होती है, जिनमें 80 से ज्यादा युवा हैं।
किडनी रोग विशेषज्ञों का कहना है कि बुंदेलखंड में कुछ विशेष कारण से युवाओं की किडनी ज्यादा खराब हो रही है। संक्रमित खानपान भी किडनी के लिए घातक है। इलाज के बाद सर्पदंश के पीड़ित की भले ही जान बच जाती है लेकिन दवा का असर किडनी पर भी पड़ता है। इसके साथ ही अव्यवस्थित जीवनशैली, खेलकूद नहीं करने, जरा-जरा सी बात पर दर्द निवारण दवाइयां खाने से युवाओं की किडनी खराब हो रही है। किडनी की बीमारी के शुरुआत में लक्षण बहुत हल्के होते हैं, जिसकी वजह से बीमारी ज्यादा बढ़ने पर पता चलता है।
ये कहना है डॉक्टरों का
किडनी रोग विशेषज्ञ डॉ. एनएस सेंगर ने बताया कि इस समय उल्टी-दस्त और पथरी की वजह से किडनी खराब होने के मामले ज्यादा आ रहे हैं। इनमें युवा भी शामिल हैं। कम पानी पीने से किडनी सिकुड़ती है या पथरी हो जाती है।