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सीपरी ओवरब्रिज में निर्माण कंपनी ही बनी बाधा

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overbridge - फोटो : demo
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झांसी। सीपरी बाजार ओवरब्रिज से इस साल के आखिर तक वाहनों से फर्राटा भरने की उम्मीद लगाए बैठे शहरवासियों के लिए दुखद खबर है। निर्माणाधीन कंपनी ही इसकी राह में रोड़ा बन गई है। कंपनी बार - बार कहती रही कि स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (सेल) से लोहा न मिलने के कारण गार्डर नहीं बन पा रहे हैं। मगर, जांच में पता लगा कि कंपनी ने सेल में पैसा ही जमा नहीं किया, इससे गार्डर नहीं मिल पा रहे हैं। रेल प्रशासन ने अब कंपनी को टेंडर खत्म करने का अल्टीमेटम देने के बाद आगे की कार्रवाई शुरू कर दी है। नया टेंडर होने पर ही अब आगे का काम शुरू हो सकेगा। कुल मिलाकर इस साल ओवरब्रिज पूरा नहीं हो सकेगा।
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 प्रदेश सरकार ने 2012 में ओवर ब्रिज निर्माण को स्वीकृति दी थी। राज्य सेतु निगम अपने हिस्से का काम 2016 में पूरा कर चुका है। जबकि, रेलवे अपने हिस्से का काम पिछले पौने तीन साल से कर रहा है। रेलवे ने दिल्ली की मैक्स आउट इंफ्रा स्ट्रक्चर कंपनी को ठेका दे रखा है। कंपनी को 22 करोड़ के काम को दो साल में पूरा करके देना था। मगर, कंपनी पौने तीन साल में अपने हिस्से का 55 फीसदी ही काम पूरा कर सकी है। पिछले एक साल से गार्डर न मिलने के कारण काम लटका है। कंपनी बार- बार कहती रही कि स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड से लोहा न मिलने के कारण गार्डर नहीं बन पा रहे हैं। यहां के लिए उत्तराखंड के काशीपुर से गार्डर बनकर आने हैं।
वहीं, तीसरी रेल लाइन के बीच आ रहे पुलों के लिए गार्डर बराबर मिल रहे हैं। इस पर निर्माण शाखा के अफसरों को शंका हुई। उन्होंने कंपनी की कार्य प्रणाली की जांच कराने का निर्णय लिया। जांच में पता लगा कि कंपनी ने सेल में पैसा ही जमा नहीं किया, इससे गार्डर नहीं मिल पा रहे हैं। रेल प्रशासन ने अब कंपनी को टेंडर खत्म करने का अल्टीमेटम दे दिया है। साथ ही टेंडर निरस्त करने की कार्रवाई शुरू कर दी गई है। संबंधित रेल अफसरों का कहना है कि अब बाकी काम के लिए नए सिरे से टेंडर होगा। टेंडर होने के बाद ही आगे का काम शुरू होगा। इस हिसाब से अब इस साल ओवरब्रिज के काम पूरा होने की कोई उम्मीद नहीं है।
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‘ टेंडर के नियम या शर्तों का उल्लंघन होता है तो नियमानुसार कार्रवाई होती है। कंपनी कार्य में भी कमियां पकड़ी गई हैं। इस कारण कंपनी पर नियमानुसार कार्रवाई की जा रही है।’
मनोज कुमार सिंह, जनसंपर्क अधिकारी।


 
कंपनी ने अभी तक यह किया काम
सीपरी बाजार ओवरब्रिज निर्माण में रेलवे के हिस्से के चारों पिलर बनाने और उनके ऊपर बीम डालने का काम पूरा हो गया है। चित्रा चौराहे की तरफ 36 मीटर के छह गार्डर रखे जा चुके हैं। इसमें एक गार्डर का वजन 75 टन है जो उत्तराखंड के काशीपुर से बनकर आए हैं।


यह काम बाकी है

अभी पटरियों के ऊपर 50 मीटर के छह और सीपरी बाजार टंकी की तरफ 36 मीटर के छह गार्डर रखने का काम बाकी रह गया है। गार्डर आने के बाद पहले सीपरी बाजार टंकी की तरफ 36 मीटर के छह गार्डर रखने का काम होना है। इसके बाद एक साथ 50 और 36 मीटरों के गार्डर के बीच शटरिंग लगाने, सरिया बांधने और सड़क बनाने का काम होगा।


जनता को दिया धोखा
सीपरी बाजार ओवरब्रिज का निर्माण 2014 में शुरू हो गया था। तब से अब तक सीपरी बाजार क्षेत्र की जनता और यहां से गुजरने वाले लोग लगातार परेशान हो रहे हैं। जाम और अतिक्रमण से जूझ रहे हैं। दुकानदारों का व्यापार चौपट है और धूल और प्रदूषण से लोगों का बुरा हाल है। लोग इस उम्मीद से मुश्किलें झेल रहे हैं कि इस साल काम पूरा होने पर स्थितियां सामान्य हो जाएंगी मगर, कंपनी ने रेलवे के साथ जनता को भी धोखा दिया।
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