झांसी। वार्षिक परीक्षाओं में इस बार भी ‘कनेक्टिविटी’ को नकल माफिया आड़ बना सकते हैं। इसको लेकर विश्वविद्यालय प्रशासन ने भी कोई योजना तैयार नहीं की है।
सत्र 2014-15 की वार्षिक परीक्षाओं में पूर्व कुलपति प्रो. अविनाश चंद्र पांडेय की विशेष नजर होने के बावजूद परीक्षा केंद्र बनाए गए नकल माफियाओं के कॉलेजों ने नेट कनेक्टिविटी फेल होने की बात कह अपने यहां के सीसीटीवी कैमरे बंद कर लिए थे। इसके बाद कॉलेजों द्वारा धड़ल्ले से नकल कराई गई थी।
जब विश्वविद्यालय प्रशासन को कॉलेज की इस चाल की भनक लगी तब तक नकल माफिया अपना काम कर चुके थे। हालांकि, बाद में विश्वविद्यालय प्रशासन ने दस बार से अधिक बार कैमरे बंद मिलने वाले कॉलेजों पर आर्थिक दंड लगाया था लेकिन यह कार्रवाई कॉलेजों के लिए बेअसर सी थी।
सूत्रों की मानें तो बीते साल की तर्ज पर इस बार भी नकल माफिया अपने धंधे को चलाने के लिए नेट कनेक्टिविटी को फिर आड़ बना सकते हैं। संभावना जताई जा रही है कि विशेषकर जालौन, बांदा के परीक्षा केंद्र बने कुछ कॉलेज अपने यहां के कैमरे बंद कर नेट कनेक्टिविटी फेल बताकर जमकर नकल करा सकते हैं।
कॉलेजों के इस हथियार का अभी तक विश्वविद्यालय प्रशासन के पास कोई तोड़ नहीं है। हालांकि, कुलसचिव व्यास नारायण सिंह का कहना है कि सभी केंद्र अध्यक्षों को निर्देशित किया गया है कि यदि एक दिन भी सीसीटीवी कैमरा खराब हुआ तो उनका सेंटर दो वर्ष के लिए डिबार कर दिया जाएगा। साथ ही आर्थिक दंड भी लगाया जाएगा।
डिबार किए कॉलेज को भी बनाया केंद्र!
बीते साल नियत समय से पूर्व प्रश्नपत्र खुल जाने पर झांसी के एक कॉलेज की परीक्षा निरस्त कर तीन साल के लिए डिबार कर दिया गया था। बुंदेलखंड विश्वविद्यालय प्रशासन ने इस बार डिबार किए गए कॉलेज को भी केंद्र बना दिया है।
हालांकि, जब मामले में बीयू अधिकारियों से बात की गई तो उन्होंने कहा कि परीक्षा समिति की बैठक में कॉलेज को डिबार किया गया था, जबकि कार्य परिषद ने चेतावनी देकर छोड़ दिया था। इस कारण कॉलेज को इस बार परीक्षा केंद्र बनाया गया है। वहीं, इसको लेकर विश्वविद्यालय में तरह-तरह की चर्चाएं हैं।