झांसी। बुंदेलखंड के बांधों का जलस्तर तेजी से नीचे जा रहा है। पिछली बार के मुकाबले इस बार ज्यादातर बांध अधिक खाली हैं। सबसे बड़ा बांध माताटीला में सिंचाई के लिए पानी नहीं बचा है। इसका पानी डेड प्वाइंट तक पहुंच गया। अब यहां सिर्फ पीने का पानी बचा है।
मऊरानीपुर स्थित लहचूरा बांध समेत अन्य बांधों का भी तकरीबन यही हाल है। ऐसे में मानसून का इंतजार हो रहा है। झमाझम बारिश न होने पर आगामी रबी सीजन में खेतों की प्यास बुझाना मुश्किल होगा।
मार्च माह के आखिरी दिनों से ही बुंदेलखंड में जलस्तर नीचे जाने लगता है। ऐसे में बांध में स्टोर पानी ही लोगों की प्यास बुझाने के काम में आता है। तीन महीने यहां पड़ने वाली भीषण गर्मी भी बांध की सतह से तेजी से पानी सोखती है। ऐसे में मार्च से जून माह बांधों की सेहत के लिए अच्छे नहीं माने जाते। इस दफा पिछले बार के मुकाबले बांधों का जल स्तर तेजी से काफी नीचे जा चुका है। जून में ही माताटीला बांध का जलस्तर डेड प्वाइंट 78.48 एमसीएम (मिलियन क्यूबिक मीटर) तक जा पहुंचा, जबकि पिछले साल जून में 562.58 एमसीएम पानी था। डेड प्वाइंट से बांध के पानी को पीने के लिए रखा जाता है। लहचूरा समेत सुकवां-ढुकुवां, पारीछा, पहूज, सपरार, पहाड़ी, लहचूरा, डोंगरी एवं खपरार बांध में भी तेजी से पानी कम हो रहा है।
सिंचाई विभाग के अभियंताओं के मुताबिक उपयोग क्षमता के मुकाबले सुकुवां ढुकुवां में 22.95 एमसीएम, पारीछा बांध में 57.055 एमसीएम तक पहुंच गया। वहीं, माताटीला बांध के अधिशासी अभियंता पंकज सिंह का कहना है कि मानसूनी सीजन से उम्मीद है कि बांध में रबी सीजन के लिए पानी भर जाएगा। राजघाट में अभी यूपी के हिस्से का पानी सुरक्षित है।
बांधों का जलस्तर
| बांधों के नाम |
जून 2024 |
जून 2025 |
| माताटीला |
562.58 |
78.48 |
| पहूंज |
18.03 |
4.21 |
| बड़वार |
31.63 |
5.297 |
| डोंगरी |
11.90 |
1.071 |
| सपरार |
64.45 |
5.551 |
| पहाड़ी |
46.0 |
3.819 |
| लहचूरा |
13.400 |
0.00 |
(आंकड़े मिलियन क्यूबिक मीटर में)