झांसी। बुंदेलखंड के महोबा में कमीशनबाजी के खेल में एक कांट्रैक्टर की हत्या का मामला अभी ठंडा भी नहीं पड़ा कि इसी बीच झांसी में सिंचाई विभाग के भी एक कांट्रैक्टर ने कमीशनबाजी का कच्चा-चिठ्ठा उजागर करके हलचल पैदा कर दी। भुक्तभोगी कांट्रैक्टर ने सीधे अधिशासी अभियंता, बेतवा पर ही कमीशन के चक्कर में प्रताड़ित करने का आरोप लगाते हुए मुख्यमंत्री एवं मुख्य अभियंता को गड़बड़झाले का पूरा ब्योरा भेज दिया एवं जांच कराए जाने की मांग की है।
झांसी प्रखंड के बेतवा नहर डिवीजन ने सिमरिया-रजवाहा मार्ग, बेतवा मुख्य नहर के सेवा मार्ग के एक हिस्से के पुनर्निर्माण के साथ पारीछा निरीक्षण भवन की मरम्मत कराई थी। कुल करीब 50 लाख रुपये की लागत के इन कार्यों को सिंचाई विभाग के ए श्रेणी में पंजीकृत भानुप्रताप सिंह की फर्म के जरिए कराया गया। यह सभी काम मार्च में पूरे होने थे लेकिन, लॉकडाउन के चलते इनकी समयसीमा में इजाफा किया गया। जून में यह सभी कार्य पूरे हो गए लेकिन, उसे सिर्फ करीब 27 लाख रुपये का ही भुगतान किया गया। भुक्तभोगी के मुताबिक टीएसी की जांच समेत अन्य सारी विभागीय औपचारिकताएं पूरी कर ली गईं। शासन में भेजे जाने वाली सभी रिपोर्ट में भी इन कार्यों को पूरा दर्शाया जा रहा लेकिन, अधिशासी अभियंता ने भुगतान की फाइल दबा ली।
मुख्यमंत्री एवं मुख्य अभियंता को दिए शिकायती पत्र के साथ उन्होंने सभी औपचारिकताओं की प्रतियां भी सौंपी हैं। मुख्यमंत्री के भेजे ज्ञापन के जरिए प्रोपराइटर भानुप्रताप ने विभाग में चल रहे खेल का ब्योरा देते हुए बताया कि विभागीय औपचारिकताएं पूरी करने के बावजूद समयसीमा बढ़ाने की एवज में अतिरिक्त कमीशन की मांग की जा रही। अधिशासी अभियंता की ओर से हो रही दो लाख की मांग पूरी न किए जाने पर उनको प्रताड़ित किया जा रहा। कांट्रैक्टर ने पूरे मामले की जांच कराए जाने की मांग की है। वहीं, अधिशासी अभियंता उमेश कुमार ने इन आरोपों से इंकार किया है।