झांसी। महानगर में विज्ञापन लगाने वाली कंपनी अब वाणिज्य कर (कामर्शियल टैक्स) देने से बच नहीं सकती हैं। हाल में ही एक विज्ञापन कंपनी की जांच के उपरांत विशेष अनुसंधान शाखा (एसआईबी) ने कंपनी पर 13.50 करोड़ की आय पर टैक्स आरोपित किया है। इस राशि पर कितना टैक्स लगेगा? यह निर्णय जल्द ही खंड अधिकारी लेंगे।
नगर निगम शहर में काम करने वाली विज्ञापन कंपनियों को किराए पर जगह उपलब्ध कराकर टैक्स वसूलता है। जबकि विज्ञापन (होर्डिंग, फ्लैक्स, पेंटिंग आदि) पर वाणिज्य टैक्स भी अदा करना पड़ता है, जो नगर निगम संबंधित कंपनियों से नहीं काट रहा है। वाणिज्य कर अधिकारियों का कहना है कि विज्ञापन के ढांचे में जिन-जिन वस्तुओं का उपयोग होता है, उन सभी वस्तुओं में उन्हें टैक्स मिलना चाहिए।
जैसे प्रिंटिंग, लोहे के गार्डर, सरिया आदि पर टैक्स मिलना चाहिए। विगत माह वाणिज्य कर विभाग की विशेष अनुसंधान शाखा की टीम ने आशिक चौराहे के निकट स्थित एक विज्ञापन कंपनी के कार्य स्थल व आफिस के सर्वे में पाया कि संबंधित कंपनी संचालक विज्ञापन कार्य में कोई टैक्स अदा नहीं कर रहा है। कंपनी संचालक के पुत्र के नाम अवश्य एक पंजीयन वाणिज्य कर कार्यालय में है, जिसमें फ्लैक्स व स्याही पर टैक्स अदा किया जा रहा है। कर निर्धारण एक जनवरी 2008 से अब तक किए गए 13.50 करोड़ के व्यापार किया जाएगा।
इस संबंध में वाणिज्य कर विभाग के एडिशनल कमिश्नर ग्रेड टू डिप्टी कुमार ने बताया कि कर निर्धारण के लिए रिपोर्ट खंड अधिकारी के पास भेज दी गई है। विज्ञापन के उपयोग में आने वाली हर वस्तु पर अलग-अलग टैक्स देय होता है।