महानगर में सीएनजी (कंप्रेस्ड नेचुरल गैस) स्टोरेज की सुविधा हो, इसके लिए दो साल पहले नगर निगम ने सभी औपचारिकताएं पूर्ण कर शासन को फाइल भेज दी थी। लेकिन, तब से लेकर अब तक फाइल वहीं पर अटकी पड़ी है। इससे शहर को प्रदूषण फ्र्री करने की योजना पर अमल नहीं हो सका है।
झांसी शहर को प्रदूषण मुक्त करने के लिए शहर में सीएनजी का सर्विस स्टेशन और फिलिंग स्टेशन बनाने के लिए सेंट्रल यूपी गैस लिमिटेड गेल इंडिया ने प्रक्रिया शुरू की थी। नगर निगम ने भी इसमें सहयोग किया और सदन की बैठक में प्रस्ताव स्वीकृत कराया गया। इसके बाद मौजा लहरगिर्द में नगर निगम द्वारा अपनी जमीन पर कार्यशाला के लिए बनाई गई बाउंड्रीवाल और रकबे की जमीन सर्किल रेट पर गेल को देने का निर्णय लिया गया। जमीन को लेकर किसी तरह का कोई विरोध न हो, इसलिए पार्षदों/ कार्यकारिणी सदस्यों ने जमीन का निरीक्षण किया। इसके बाद संपत्ति विभाग की टीम ने मौके पर जाकर नापजोख की और मौजा लहरगिर्द में पहूंज नदी के किनारे की जमीन (आराजी संख्या 790) के रकबा में करीब डेढ़ हेक्टेयर जमीन चिह्नित की।
जमीन को लेकर गेल ने 66 लाख रुपये नगर निगम के खाते में जमा कर दिए ताकि जमीन संबंधी औपचारिकता पूरी हो जाए। नगर निगम ने पूरी रिपोर्ट शासन को भेज दी, लेकिन तब से लेकर अब तक रिपोर्ट ठंडे बस्ते में पड़ी है। ऐसे में अंदाजा लगाया जा सकता है कि बढ़ते प्रदूषण को रोकने के प्रति शासन कितना गंभीर है।
गौरतलब है कि झांसी में करीब आठ हजार आटो संचालित हैं। यह आटो यदि सीएनजी से संचालित होने लगते तो प्रदूषण पर निश्चित तौर पर लगाम लगती। यही नहीं, सीएनजी का फिलिंग स्टेशन होने से सीएनजी कारों और अन्य वाहनों की ब्रिकी बढ़ती और इससे लोगों को गैस की सुविधा मिलती। लेकिन, इस ओर ध्यान नहीं दिया जा रहा है।
सर्किल रेट पर गेल इंडिया को जमीन देने की औपचारिकता पूरी कर ली गई थी। इसके बाद स्वीकृति के लिए फाइल शासन में भेजी गई, लेकिन अभी तक कोई जवाब नहीं आया है। इसको लेकर रिमाइंडर भी दिया जा चुका है।
- अरुण प्रकाश, नगर आयुक्त