झांसी। शनिवार की सुबह को करीब दस बजे नगर पंचायत मोंठ के चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी ने पत्नी और बेटे की गला दबाकर हत्या करने के बाद खुद भी फांसी लगाकर जान दे दी। कमरे का दरवाजा तोड़कर तीनों के शव बाहर निकाले गए। मां-बेटे के शव फर्श पर पड़े थे, जबकि बाबू का शव खिड़की से लटका मिला। हालांकि मौके से कोई सुसाइड नोट नहीं मिला है।
थाना प्रेमनगर स्थित मुहल्ला खैर निवासी जितेंद्र श्रीवास (35) नगर पंचायत मोंठ में चपरासी था। आज वह आफिस भी नहीं गया था। घटना की जानकारी भी लोगों को दोपहर में करीब साढ़े बारह बजे उस वक्त हुई जब जितेंद्र श्रीवास का छोटा भाई संजीव घर पहुंचा। दरवाजा भीतर से बंद था। उसने काफी खटखटाया, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। संजीव पड़ोसी के घर से होते हुए अपने भाई के घर में पहुंचा तो कमरे का दरवाजा भी बंद मिला। किसी तरह पड़ोसियों की मदद से दरवाजा तोड़ा गया तो जितेंद्र श्रीवास का शव खिड़की से लटका हुआ था जबकि जितेंद्र की पत्नी अनीता (30) और बेटे अंशुल (11) के शव फर्श पर पड़े थे। एसपी सिटी राहुल श्रीवास्तव ने बताया कि जितेंद्र का बेटा अंशुल साढ़े नौ बजे ट्यूशन पढ़कर घर पहुंचा था। इससे माना जा रहा है कि दस बजे के आसपास की यह घटना रही होगी। परिवार वालों ने पुलिस को बताया कि जितेंद्र श्रीवास बीमार चल रहा था। 20 फरवरी को ही एम्स में इलाज कराने के बाद लौटा था। घर वालों और संबंधियों से भी अक्सर कहा करता था कि उसकी तबीयत लगातार बिगड़ रही है। अगर उसे कुछ हो गया तो परिवार का क्या होगा। इसी से परेशान होकर उसने यह कदम उठाया है। एसपी सिटी राहुल श्रीवास्तव ने बताया कि जितेंद्र बीमारी के चलते परेशान था। डिप्रेशन में रहने लगा था। दिल्ली के एम्स और लखनऊ के पीजीआई में उसका इलाज भी चल रहा था।