झांसी। इटावा से मेला ड्यूटी के लिए मऊरानीपुर आई महिला सिपाही द्वारा लगाए गए सामूहिक बलात्कार के मामले में एसएसपी ने दोनों सिपाहियों को क्लीन चिट दे दी है। उन्होंने महिला आरक्षी द्वारा लगाए गए आरोपों को गढ़ी हुई कहानी बताया। पुलिस द्वारा हिरासत में लिए गए दोनों सिपाहियों को छोड़ दिया गया है।
गौरतलब है कि पिछले दिनों इटावा महिला थाने में तैनात महिला सिपाही ने इटावा के थाने में मुकदमा दर्ज कराया था कि उसकी मऊरानीपुर जल विहार मेला में ड्यूटी लगी थी। 28 सितंबर को ड्यूटी पूरी कर वह झांसी पुलिस लाइन जा रही थी। तभी झांसी कोतवाली में तैनात सिपाही अजय यादव और औरैया में तैनात भैयालाल ने उसे पुलिस लाइन छोड़ने की बात कहकर कार में बैठा लिया था। रास्ते में स्थित जंगल में दोनों सिपाही व चालक ने उसके साथ बलात्कार किया था। आईजी जोन के आदेश पर चार अक्तूबर को गैंगरेप का मुकदमा दर्ज किया गया था। इटावा पुलिस ने घटना के दस्तावेज झांसी एसएसपी के पास भेज दिए। मामले की गंभीरता को देख मऊरानीपुर पुलिस ने दोनों आरोपी सिपाहियों को मंगलवार को हिरासत में ले लिया था। पूछताछ और जांच में मिले तथ्यों के आधार पर आरोप गलत पाया गया।
एसएसपी सुभाष चंद्र दुबे ने बताया कि मोबाइल की लोकेशन की जांच से घटना के समय दोनों सिपाही मऊरानीपुर में ही होना पाए गए। कथित पीड़िता ने अपनी महिला सहकर्मी को प्रत्यक्षदर्शी बताया था। जबकि, सहकर्मी ने अपने बयान में बताया कि वह घटना के समय मौजूद ही नहीं थी। इससे साफ हो गया कि घटना को गढ़ा गया है। पीड़िता का सिपाही से रिश्तेदारी को लेकर को विवाद चल रहा है। वह स्थानांतरण कराके कानपुर नगर आना चाहती है। प्रार्थना पत्र में उसने स्थानांतरण कानपुर नगर करने व एक गनर की मांग की है। इस प्रकरण में दोनों सिपाही निर्दोष पाए गए हैं। दोनों को हिरासत से छोड़ दिया गया है। हालांकि, मेडिकल रिपोर्ट का भी इंतजार किया जा रहा है। पीड़िता के सामने पेश होने पर ही आगे की जांच होगी।