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शहर पर मलेरिया, टाइफाइड, डायरिया का हमला

Tue, 30 Aug 2016 01:09 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
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hospital, jhansi news - फोटो : demo
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झांसी। मौसम का उतार चढ़ाव स्वास्थ्य की दृष्टि से बेहद घातक साबित हो रहा है। शहर मलेरिया, टाइफाइड, डायरिया जैसी बीमारियों की चपेट में हैं। अस्पतालों में मरीजों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। जिला अस्पताल में प्रतिदिन पांच सौ मरीज पहुंच रहे हैं, यही हाल निजी अस्पतालों और क्लिनिकों का भी है।
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दिन में तीखी धूप और शाम को झमाझम बारिश, इसके बाद अगले दिन सुबह फिर चिलचिलाती धूप, आजकल मौसम की यही चाल है। मौसम में लगातार उतार चढ़ाव जारी है। लेकिन, बारिश, धूप और उमस का यह गठजोड़ लोगों को बीमार बना रहा है। मलेरिया, टाइफाइड व डायरियां घर-घर में दस्तक दे रहा है। सरकारी व निजी अस्पताल-क्लिनिकों में मरीजों की संख्या दिनों दिन बढ़ती जा रही है।

जिला अस्पताल में एक पखवाड़े पहले जहां ढाई सौ से तीन मरीज रोजाना पहुंचते थे, तो वहीं अब यह संख्या बढ़कर पांच सौ से अधिक हो गई है। वैसे तो यह बीमारियां हर आयु वर्ग के लोगों को अपनी चपेट में ले रही हैं, परंतु महिलाओं व बच्चों में इनका संक्रमण तेजी से फैल रहा है। हालांकि, सावधानी बरतने से इन बीमारियों से बचा जा सकता है। इसके अलावा बीमारी होने पर तत्काल इलाज कराना भी फायदेमंद साबित होता है। 
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डायरिया 
जब व्यक्ति की पाचन क्रिया सुचारु रूप से कार्य करना बंद कर देती है, तब उल्टी व पतले दस्त होने लगते हैं। यह स्थिति डायरिया कहलाती है। आमतौर पर यह एक सप्ताह में ठीक हाता है। इससे ज्यादा समय तक बने रहने पर यह क्रानिक डायरिया बन जाता है। समय पर इलाज न होने से यह खतरनाक साबित हो सकता है। यह पेट के कीड़ों व वैक्टेरिया के संक्रमण से होता है। इसके अलावा आसपास सफाई न होने, शरीर में पानी की कमी व पाचन शक्ति कमजोर होने से भी यह अपनी चपेट में ले लेता है।

दस्त, पेट में दर्द होना, पेट में मरोड़ पड़ना, उल्टी आना, बुखार होना व कमजोरी महसूस होना इसके प्रमुख लक्षण हैं। इसके बचाव के लिए आसपास साफ सफाई रखें, गरिष्ठ भोजन न करें, शरीर में पानी की कमी न होने दें, पानी साफ पीएं व बेहतर होगा कि इस मौसम में नियमित रूप से नमक व शक्कर का घोल पीते रहें।

मलेरिया 
यह वर्षा ऋतु में फैलने वाला खतरनाक रोग है। इसका संक्रमण मादा एनोफेलेस मच्छर के काटने से होता है। संक्रमित मच्छर अपना संक्रमण लार के रूप में मनुष्य के शरीर में छोड़ देता है। सामान्य तौर पर मलेरिया का संक्रमण एक सप्ताह बाद नजर आता है। इसमें ठंड के साथ तेज बुखार आता है, सिर दर्द व बदन दर्द बना रहता है, जी मचलाता है व उल्टी आती है। कमजोरी महसूस होती है और भूख नहीं लगती है। इससे बचाव के लिए मच्छरों से बचना जरूरी है।

बारिश व धूप के इस मौसम में मच्छर तेजी से पनपते हैं। इन दिनों में विशेष सावधानी बरती जाए। आसपास पानी जमा न होने दें तथा पूरी आस्तीन के कपड़े पहनें। इसके अलावा मच्छरों से बचने के लिए मच्छरदानी, क्वाइल आदि का इस्तेमाल करें। 

टाइफाइड
यह एक खतरनाक संक्रामक रोग है। इसे मियादी बुखार भी कहा जाता है। इसमें तेज बुखार आता है। इसके अलावा बदन दर्द, कमजोरी, सिर दर्द, पेट दर्द, कम भूख लगना, बचों में दस्त की शिकायत, बड़ों में कब्ज की शिकायत शिकायत होती है। इससे बचने के लिए खान पान का स्वच्छ होना जरूरी है। पानी को उबाल कर बाद में ठंडा होने पर पीएं। सब्जी, फल धो कर खाएं, खुले में रखे कटे हुए फल न खाएं। इसके अलावा कुछ भी खाने से पहले साबुन से हाथ जरूर धोएं। बाजार के खाद्य पदार्थों से बचें, घर का खाना खाएं। बुखार आने की स्थिति में अपने कपड़े, चादर, तौलिया आदि का इस्तेमाल किसी दूसरे को न करने दें। 

सतर्कता ही है बचाव 
डायरिया, मलेरिया, टाइफाइड मौसम जनित बीमारियां हैं। धूप, बारिश और उमस के उतार चढ़ाव से पिछले एक पखवाड़े में इसके मरीजों की संख्या में तेजी से बढ़ोत्तरी हुई है। जिला अस्पताल में रोजाना पांच सौ से अधिक मरीज पहुंच रहे हैं। इससे बचने के उपाय आसान है, बस सतर्कता की जरूरत है। जिला अस्पताल में खून की जांच की भी नि:शुल्क व्यवस्था है। 
- डा. अतुल गुप्ता, वरिष्ठ परामर्शदाता - जिला अस्पताल 

खून की जांच से होती है पुष्टि 
वैसे तो मलेरिया और टाइफाइट जैसी बीमारियों का पता इनके लक्षणों से चल जाता है, परंतु इसकी पुष्टि के लिए खून की जांच जरूरी है। जांच रिपोर्ट के अनुसार ही चिकित्सक दवा देते हैं। इन जांचों का खर्च दो सौ से चार सौ रुपये आता है। रिपोर्ट एक घंटे में आ जाती है। जबकि, डायरिया के लिए खून की जांच जरूरी नहीं है। 
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- डा. वीके गुप्ता, परख ब्लड बैंक
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