झांसी। एनआईटी श्रीनगर में गैर कश्मीरी छात्रों पर पुलिस द्वारा किए गए लाठीचार्ज और कैंपस में जारी तनाव पर ‘अमर उजाला’ ने बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के छात्रों की राय ली। इस मुद्दे पर छात्र-छात्राओं ने प्रमुखता से अपनी बात रखी। किसी ने अपने लोकतांत्रिक देश में कुछ भी बोलने, कहीं भी घूमने पर पूरी स्वतंत्रता होने की वकालत करते हुए लाठीचार्ज की निंदा की तो किसी ने देशभक्ति को नारे का सहारा न लेने का सुझाव दिया। पेश है कुछ छात्रों से बातचीत के अंश।
एनआईटी कश्मीर परिसर में मौजूदा स्थितियां चिंताजनक हैं। भारत के संप्रभु क्षेत्र में भारत माता की जय बोलने के लिए संघर्ष करना पड़े तो ये राष्ट्र में परातंत्रता की निशानी है। - अभिमन्यु हर्षे, फॉरेंसिक साइंस
एनआईटी के विद्यार्थियों में ही दो तरह से विभाजन हो गया है। एक देश भक्तों का, दूसरा देशद्रोहियों का। ऐसा होना विद्यालय और विद्यार्थियों के लिए एक अस्वस्थ वातावरण उत्पन्न करता है। - स्मिता राय, फॉरेंसिक साइंस
देश के प्रति समर्पण की भावना नारे लगाने से साबित नहीं होती है। अगर हम अपने देश के प्रति कुछ करना चाहते हैं, तो देश की प्रगति का हिस्सा बनें। घर बैठकर देशभक्ति नहीं होती। - ऋषिकांत शर्मा, ललितकला विभाग
कश्मीर देश का अभिन्न अंग है। एनआईटी छात्रों द्वारा तिरंगा लहराने पर उनके ऊपर पुलिस द्वारा की गई कार्रवाई अमानवीय है। केंद्र सरकार कश्मीर में समान नागरिकता कानून लागू कराए। - सृष्टि राजपूत, बीकॉम ऑनर्स
भारत लोकतांत्रिक देश है। यहां छात्र कहां पढ़ना व रहना चाहता है, इसका निर्णय वह स्वयं करेगा। श्रीनगर में छात्रों को देश के प्रति श्रद्धा भावना दिखाने से मना करना बेहद दुखद बात है। - पुरुषोत्तम शुक्ला, छात्र बीयू