झांसी। पिछले दिनों में गलवां घाटी में चीनी सैनिकों और भारतीय जवानों के बीच हुई हिंसक झड़प के बाद पूरे देश में चीन के खिलाफ नाराजगी है। चीन को सबक सिखाने के लिए अब उसे कई तरीकों से आर्थिक नुकसान पहुंचा जा रहा है। महानगर में स्मार्ट सिटी योजना के तहत निगरानी के लिए चाइना के सीसीटीवी कैमरे नहीं लगेंगे। निगम ने कार्यदायी संस्था से लिखित अनुबंध कराया है। साथ ही किसी भी कार्य में चीन के सामान का प्रयोग नहीं करने के लिए कहा गया है।
स्मार्ट सिटी के तहत नगर निगम में इंटीग्रेटेड कमांड कंट्रोल सेंटर का काम लार्सन एंड टूब्रो कंपनी को सौंपा है। कमांड सेंटर में हाई स्पीड डेटा प्रोसेसिंग मशीनें लगाई जानी हैं। अत्याधुनिक तकनीक के 300 कैमरे महानगर में जगह-जगह लगाए जाने हैं। इसके लिए कंपनी से कराए गए अनुबंध में चाइना के सामान का इस्तेमाल न करने के लिए कहा गया है। 180 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले कमांड सेंटर में लगने वाली मशीनों में भी चीन के सामान का इस्तेमाल न करने के निर्देश दिए गए हैं।
कमांड सेंटर से होंगे ये फायदे
कमांड सेंटर के जरिये सर्विलांस, सीसीटीवी, जीपीएस सिग्नल प्रणाली, वाहनों के नंबरों की पहचान, बैरियर एवं मेसेज डिसप्ले बोर्ड के संदेश संचालित होंगे। इसके अलावा साफ सफ ाई, यातायात व्यवस्था, जलापूर्ति, सीवरेज एवं बिजली आपूर्ति, वाहनों की चेकिंग जैसे कार्य भी यहां संचालित हो सकेंगे। कमांड सेंटर से पूरे शहर में लगने वाले तीन सौ से अधिक कैमरों को भी जोड़ा जाएगा। यह अत्याधुनिक कैमरे नब्बे डिग्री तक घूमकर आसपास की बारीक गतिविधियों को भी कैद करेंगे। साथ ही पार्किंग पर भी निगाह रखी जाएगी। हाई स्पीड डेटा विश्लेषण मशीनों के जरिये शहर के ट्रैफि क का आकलन किया जाएगा।
कमांड सेंटर के लिए कराए गए अनुबंध में कार्यदायी संस्था से चीन का सामान प्रयोग न करने के लिए कहा गया है। खासकर कैमरे लगाने में चाइनीज सामान का इस्तेमाल नहीं किया जाएगा। इसकी निगरानी भी कराई जाएगी। अमित शर्मा, नोडल अधिकारी स्मार्ट सिटी