अमर उजाला की ओर से आयोजित बाल फिल्म महोत्सव में बच्चों को दो फिल्में कभी पास-कभी फेल व एक अजूबा प्रदर्शित की गई। दोनों फिल्मों को देख बच्चे प्रोत्साहित हुए और जाना कि मेहनत से ही सफलता मिलती है।
डाटा एकेडमी में एक अजूबा प्रदर्शित की गई। इस फिल्म से बच्चों ने जाना कि ढोंग से नहीं बल्कि मेहनत से सफलता मिलती है। फिल्म में दर्शाया गया कि एक भाई-बहन स्कूल में पढ़ते हैं जो चाहते हैं कि कोई ऐसा चमत्कार हो जाए कि वो एकाएक होशियार हो जाएं। एक दिन एक बाबा घर आकर लड़की को भभूति दे देते हैं। लड़की एकाएक होशियार हो जाती है। उसे देख भाई चिढ़ जाता है और दोस्त के साथ मिलकर उसकी कलाई में भभूति को बदल देता है। बावजूद, उसकी बहन क्लास में प्रथम आती है। बाबा वापस आते हैं और बताते हैं कि कोई ढोंग से नहीं बल्कि मेहनत से सफलता मिलती है।
ड्रीम इंडिया पब्लिक स्कूल में प्रदर्शित कभी पास-कभी फेल में दर्शाया गया कि रॉबिन जो गणित में बेहद होशियार होता है। झट से हर सवाल का जवाब दे देता है। उसकी गांव-गांव में ख्याति होने लगती है। उसके अंदर छिपे इस हुनर को देख उसका चाचा उसे पढ़ाने-लिखाने के बहाने शहर ले जाता है और जगह-जगह उसके हुनर को अपने लाभ के लिए प्रदर्शन करना शुरू कर देता है। उसे रुपये कमाने का प्रलोभन दिया जाता है। लेकिन, वह लालच में नहीं आता और पढ़ लिखकर आगे बढ़ने के लिए वहां से भागकर वापस गांव आ जाता है। इस दौरान प्रधानाचार्या प्रिया शर्मा, आशुतोष द्विवेदी, अमित गुप्ता, प्राची शुक्ला, भारत कुशवाहा मौजूद रहे।
फिल्म देखकर जाना कि मेहनत के अलावा अन्य किसी प्रकार से सफलता नहीं मिलती। अब से मेहनत करूंगी और क्लास में अव्वल आऊंगी।
- खुशी वर्मा
फिल्म में सफलता के पीछे का राज जानने की सीख मिली पर यह भी जाना कि किसी से हमें द्वेश भावना नहीं रखनी चाहिए। बल्कि उससे ज्यादा मेहनत करनी चाहिए।
- श्रद्धा मिश्रा
कभी पास- कभी फेल में जाना कि हमें किसी के भी बहकावे में आकर कोई कदम नहीं उठाना चाहिए। अपनी क्षमता का उपयोग कर आगे बढ़ना चाहिए।
- हेमंत यादव