झांसी। सरकारी की तमाम सख्ती के बावजूद मिलीभगत करके मरीजों की जेब पर डाका डाला जा रहा है। इन दवाओं पर एमआरपी (अधिकतम खुदरा मूल्य) खरीद कीमत से 10 से 50 गुना तक ज्यादा होती है। दवा विक्रेताओं के एसोसिएशन ने कड़ा विरोध कर सख्त कदम उठाने की मांग की है।
बुंदेलखंड केमिस्ट एसोसिएशन के केंद्रीय अध्यक्ष विनय उपाध्याय का कहना है कि सबसे पहले डॉक्टरों को दवा का ब्रांड नहीं, बल्कि ड्रग्स कंपोनेंट लिखना चाहिए। कई रोगियों से नर्सिंगहोम में मिलने वाली दवाओं पर ज्यादा वसूली की जाती है। कंपनियों से मिलीभगत की वजह से ही नर्सिंगहोम के डॉक्टर द्वार लिखी दवा वहां के केमिस्ट पर ही मिलती है। इसलिए महंगे दामों पर दवाएं खरीदना रोगी की मजबूरी होती है।
डिस्ट्रिक्ट केमिस्ट एसोसिएशन के महामंत्री नितिन मोदी का कहना है कि सरकार को दवाओं के रेट निर्धारण की व्यवस्था पर सख्ती से अंकुश लगाना चाहिए। रोगियों से दवा की कीमत से कई गुना वसूली नर्सिंगहोम में होती है। उन्होंने कहा कि अत्यधिक एमआरपी वाली दवाइयों का मूल्य निर्धारण सरकार करे। कंपनी स्तर से मूल्य निर्धारण बंद होना चाहिए। तब आम जनता को इसका लाभ मिलेगा।