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चार दिन तक कमरे में पड़ा रहा शव, बदबू आने के बाद पता चला

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झांसी। रसबहार कॉलोनी में एक शख्स की मौत चार दिन पहले मौत हो गई थी। बदबू आने पर उनकी मौत का पता चला। पुलिस की शुरुआती पड़ताल में उनकी मौत बीमारी से होने की आशंका जताई जा रही है। देर शाम पोस्टमार्टम के बाद विसरा जांच के लिए सुरक्षित रख लिया गया है।
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पुलिस के मुताबिक थाना सीपरी बाजार क्षेत्र में स्थित रसबहार कॉलोनी निवासी राजेंद्र शर्मा (56) घर में अकेले रहते थे। पड़ोस में उनके भाई रवींद्र शर्मा रहते हैं। वह रेलवे में परिवहन निरीक्षक के पद पर तैनात हैं। रविवार सुबह राजेंद्र शर्मा के मकान से भयंकर बदबू आने के बाद उन्होंने इसकी जानकारी अन्य लोगों को दी। सूचना पाकर सीओ सिटी राजेश कुमार सिंह, सीपरी बाजार प्रभारी निरीक्षक देेवेंद्र और मसीहागंज चौकी प्रभारी नरेंद्र सिंह मौके पर पहुंचे। घर के बाहर से सीढ़ी लगाकर सभी अंदर पहुंचे। कमरे में जाकर देखा तो राजेंद्र मृत अवस्था में पड़े थे। पुलिस ने शव को कब्जे में लिया। फॉरेंसिक टीम ने भी निरीक्षण किया। रवींद्र शर्मा ने बताया कि उनके भाई राजेंद्र दिव्यांग थे। बीस साल पहले पत्नी से तलाक होने के बाद वह उनको छोड़कर चली गई थी। उनके एक बेटा भी है, जो साथ नहीं रहता था। पुलिस मामले की जांच कर रही है।
बीमारी के चलते उनकी मौत मानी जा रही है। पुलिस अपने स्तर से जांच कर रही है। पोस्टमार्टम के बाद विसरा सुरक्षित रख लिया है।
राजेश कुमार सिंह, सीओ सिटी
लोग समझते रहे चूहा मर गया, घर में पड़ा रहा राजेंद्र का शव
झांसी। शनिवार सुबह राजेंद्र का शव मिलने से पहले बदबू से पूरा मोहल्ला परेशान था। लेकिन लोग समझ नहीं पा रहे थे कि आखिर बदबू कहां से आ रही है। मोहल्ले के लोग बदबू का कारण चूहा मरना समझते रहे और चार दिन तक उनका शव घर मेें पड़ा रहा। भाई ने बताया कि शनिवार की सुबह बदबू का अहसास हुआ था। लेकिन, घर में चूहे मारने की दवा डाल रखी थी। उनको लगा कि शायद चूहा मरने की बदबू आ रही होगी। सोमवार सुबह पूरे मोहल्ले में तेज बदबू आने के बाद पूरे मामले का पता लगा। परिजनों के मुताबिक 2014 में मां के निधन के बाद मकान का बंटवारा हो गया था। एक हिस्सा राजेंद्र शर्मा व दूसरा रवींद्र शर्मा को मिला था। बंटवारे के बाद से ही दोनों भाइयों में बातचीत भी कम हो गई थी। ऐसे मेें तीन दिन तक उनका शव घर मेें पड़ा रहा और किसी को भनक तक नहीं लगी।
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पेंशन से होता था गुजारा
राजेंद्र को दिव्यांग पेंशन मिलती थी। साथ ही खर्च के लिए किराएदार भी रख लेेते थे। लेकिन, कुछ समय से किराएदार न होने के चलते वह अकेले ही रह रहे थे। 24 फरवरी की शाम को आखिरी बार पड़ोसियों ने दरवाजे पर उनको देखा था।
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