जुलाई दिन मंगलवार को पड़ने वाली गुरु पूर्णिमा पर भी चंद्रग्रहण का साया रहेगा। त्यौहार की रात 1 बजकर 31 मिनट से ग्रहण शुरू हो जाएगा। लेकिन इसका सूतक नौ घंटे पहले ही लग जाएगा। ऐसे में शाम 4:30 बजे के बाद से गुरु, मूर्ति पूजा पर रोक लग जाएगी और मंदिरों के कपाट भी बंद हो जाएंगे। बीते साल 2018 में भी गुरु पूर्णिमा पर चंद्रग्रहण पड़ा था।
सनातन धर्म में गुरु पूर्णिमा का विशेष महत्व है। इसे व्यास पूर्णिमा और आषाढ़ की पूर्णिमा भी कहते हैं। सभी लोग इस त्यौहार पर अपने - अपने गुरुओं की पूजा करते है और विशाल भंडारे तथा अन्य धार्मिक कार्यक्रम भी आयोजित कराते हैँ। इस साल 16 जुलाई मंगलवार को यह पर्व मनाया जाएगा। लेकिन त्यौहार की रात में चंद्रग्रहण होने से उसका सूतक नौ घंटे पूर्व लग जाएगा। धर्माचार्य हरीओम पाठक के अनुसार सूतक व ग्रहण अवधि में मूर्ति पूजा, गुरु पूजा और भोजन करना प्रतिबंधित रहता है। व्यक्ति धार्मिक कार्यों में जप व यज्ञ कर सकता है। उनके अनुसार चंद्रग्रहण से बाजार में महंगाई बढ़ने, जन आंदोलन होने की संभावना है। मेष, सिंह व धनु राशि के जातकों पर इसका प्रभाव पडे़गा। ऐसे में इन राशियों के जातक ग्रहण को न देखे और घर में जप करे।
स्नान व दान का है महत्व
हिंदू धर्म में चंद्रग्रहण को धार्मिक रूप से काफी महत्वपूर्ण माना जाता है। मान्यताओं के अनुसार इस ग्रहण के बाद स्नान, ध्यान और दान किया है। गेहूं, चावल, दाल, गुड, चना, वस्त्र, आभूषण आदि वस्तुएं दान की जाती हैं। 16 जुलाई की रात का ग्रहण भारत सहित विश्व के अधिकांश देशों में देखा जा सकेगा।