दुर्घटनाग्रस्त होने से बची चंबल और सचखंड एक्सप्रेस
झांसी। चंबल एक्सप्रेस के इंजन से अंबावाय के निकट पटरी का एक टुकड़ा टकराया गया। इससे इंजन का केटल गार्ड टूट गया। गनीमत रही कि ट्रेन दुर्घटनाग्रस्त नहीं हो सकी। इसी तरह नांदेड से अमृतसर जाने वाली ट्रेन के इंजन के पीछे लगे एसएलआर कोच के एक्सल की प्लेट निकल गई, जिसे वक्त पर देख लिया गया। बाद में ट्रेन से एसएलआर कोच को अलग कर गाड़ी को आगे बढ़ाया गया। रेल प्रशासन दोनों मामले की जांच कर रहा है।
बुधवार की शाम तीन कर्मचारी झांसी- करारी सेक्शन की डाउन ट्रैक पर रेल डाली से पटरी के टुकड़े लेकर ़जा रहे थे। अंबावाय के निकट मोड़ पड़ने पर कर्मचारियों को पीछे आ रही हावड़ा से ग्वालियर जाने वाली चंबल एक्सप्रेस दिखाई नहीं पड़ी। जब मोड़ पर चालक ने हॉर्न बजाना शुरू किया तो हड़बड़ाहट में दो कर्मचारियों ने तो रेल डाली पटरी से उतारकर अलग कर ली, लेकिन एक कर्मचारी ऐसा नहीं कर सका। पटरी मौके पर ही छूट गई। चालक ने ब्रेक लगाकर ट्रेन को रोकने का प्रयास किया, लेकिन पटरी इंजन से टकरा ही गई। पटरी के टकराने के समय ट्रेन की रफ्तार 50 किलोमीटर प्रति घंटा थी। ट्रेन रुकने के बाद चालक ने देखा कि पटरी टकराने से इंजन का केटल गार्ड क्षतिग्रस्त हो गया है। मगर, इंजन को और कोई नुकसान नहीं पहुंचा था। गनीमत रही कि ट्रेन दुर्घटनाग्रस्त नहीं हो सकी। बाद में संबंधित विभाग के सुपरवाइजरों ने मौके पर पहुंचकर घटना का ज्वाइंट नोट रिपोर्ट तैयार की। रिपोर्ट उच्च अधिकारियों को सौंप दी गई।
वहीं, नांदेड से अमृतसर जाने वाली सचखंड एक्सप्रेस प्लेटफार्म चार पर आकर रुकी। इसी बीच रोलिंग स्टाफ ने देखा कि इंजन के पीछे लगे एसएलआर कोच (सामान रखने का कोच) के एक पहिये के एक्सल की प्लेट टूटकर गिर गई है। इस बात का पता लगने पर संबंधित विभागों के सुपरवाइजर मौके पर पहुंच गए। बाद में कोच को ट्रेन से हटाने का निर्णय लिया गया। कोच कटने के बाद ही ट्रेन गंतव्य के लिए रवाना हो सकी। इस काम में 40 मिनट का वक्त लग गया। बताया गया है कि अगर ट्रेन उसी स्थिति में आगे बढ़ जाती तो आगे वह कोच पटरी से उतर सकता था।
यह हुई चूक
रेल पटरियों के टुकड़ों को एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाने के लिए गैंगमैन रेल डाली का प्रयोग करते हैं। वह रेल डाली की मदद से पटरी को पकड़ लेते हैं और उसमें लगे पहिये की मदद से खींचकर आगे ले जाते हैं। वैसे इस काम को ब्लाक (रेल संचालन) लेकर करना चाहिए। मगर, अधिक ट्रैफिक के कारण हर वक्त ऐसा संभव नहीं हो पाता। इसलिए रेल पटरी ले जाते वक्त एक कर्मचारी आगे लाल झंडा लेकर चलता है, ताकि कोई ट्रेन आ जाए तो वह अपने साथियों को सीटी बजाकर सतर्क कर सके। मगर, बुधवार की शाम ऐसा नहीं किया गया।