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केंद्रीय टीम ने किया फसलों के नुकसान का आकलन

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खराब हुई फसलों का सर्वे करने आई केंद्रीय टीम से बातचीत करते किसान। - फोटो : DEHAT
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केंद्रीय टीम ने किया फसलों के नुकसान का आकलन
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झांसी। आपदा राहत प्रबंधन टीम रविवार को फसलों के नुकसान का आकलन करने मऊरानीपुर और सदर तहसील के गांव पहुंची। टीम के सदस्यों ने यहां ग्रामीणों से मिलकर नुकसान का ब्योरा लिया। खेल के हालत भी देखे। मौके पर स्थानीय लेखपालों को बुलाकर पीड़ित किसानों की सूची बनाने के निर्देश दिए। टीम के सदस्यों ने भी जनपद में फसलों के भारी नुकसान की बात मानी है।
23 सितंबर से तीन अक्तूबर के बीच जनपद में हुई अतिवृष्टि से मूंग, उर्द, तिल, मूंगफली आदि की फसल को काफी नुकसान हुआ। कृषि एवं राजस्व विभाग ने भी भारी नुकसान की पुष्टि की। राजस्व विभाग ने करीब 170 करोड़ रुपये के नुकसान का आकलन करके रिपोर्ट शासन को भेजी। इसके परीक्षण के लिए शनिवार को कृषि मंत्रालय के निदेशक डॉ. मान सिंह की अगुवाई में अपर गंगा बेसिन प्राधिकरण के निदेशक वीसी विश्वकर्मा एवं केंद्रीय ऊर्जा प्राधिकरण के उपसचिव लवकुश सिंह की तीन सदस्यीय आपदा राहत टीम यहां पहुंची।
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तीन सदस्यीय टीम ने आज फुटौरा, घुघवा, जावन, मांगरा एवं मऊरानीपुर गांव पहुंचकर खेतों का जायजा लिया। टीम के सदस्यों ने बारिश से खराब हुई फसल की तस्वीरें भी लीं। उन्होंने पीड़ित किसानों से भी बात की। किसानों ने बताया कि बारिश होने से पूरी खड़ी फसल बर्बाद हो गई। अधिक बारिश न होती तो इस बार अच्छी फसल की उम्मीद थी। टीम के सदस्यों ने स्थानीय लेखपालों को भी मौके पर बुलाकर सभी पीड़ित किसानों को सूची बनाने को कहा।
राजस्व विभाग के आकलन के मुताबिक मूंग को शत प्रतिशत फीसदी, उर्द 90 फीसदी, तिल 90 फीसदी, मूंगफली 40 फीसदी एवं धान को पांच फीसदी नुकसान का आकलन किया गया है। इन गांवों में जांच-पड़ताल के बाद टीम महोबा के लिए रवाना हो गई। इस दौरान कृषि उप निदेशक कमल कटियार, जिला कृषि अधिकारी कमलेश कुमार सिंह समेत प्रशासनिक अधिकारी मौजूद रहे।
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आज से आरंभ होगी कृषि पाठशाला
झांसी। किसानों को रबी की फसल के लिए अहम जानकारियां देने के लिए सभी न्याय पंचायतों में सोमवार से किसान पाठशाला आरंभ होगी। कृषि उपनिदेशक कमल कटियार के मुताबिक पाठशाला के जरिए प्राविधिक सहायक किसानों को रबी की फसल की बुवाई से लेकर उसके रखरखाव के तरीके समझाएंगे। किसान इसमें अपनी समस्याएं भी बता सकते हैं। यह पाठशाला चार दिनों तक लगातार दो घंटे साढ़े तीन से साढ़े पांच बजे तक स्थानीय प्राथमिक विद्यालय अथवा चौपाल में आयोजित की जाएगी।
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