झांसी। वीरांगना नगर में जिस जगह पर नवजात बच्ची के शव को कुत्ते नोंच रहे थे, वहां पर ही आधा दर्जन से अधिक नर्सिंगहोम हैं। इसके अलावा मेडिकल कॉलेज और उसके सामने भी कई अस्पताल हैं, जहां प्रसव होते हैं। जगह-जगह सीसीटीवी कैमरे भी लगे हैं। पुलिस यदि अस्पतालों से पिछले चार-पांच दिनों में जन्म लेने वाले बच्चों का रिकॉर्ड और फुटेज से पड़ताल करे तो नवजात के गुनहगार तक पहुंच सकती है।
शनिवार सुबह वीरांगना नगर में मिली नवजात बच्ची के पैरों में स्याही लगी हुई है। इससे स्पष्ट है कि वो भ्रूण नहीं, बल्कि नवजात बच्ची ही है और उसकी डिलीवरी किसी अस्पताल में हुई है। डॉक्टरों ने बताया कि चाहें सरकारी अस्पताल हो या निजी हॉस्पिटल, हर जगह नवजात की पहचान के लिए कागज पर पैरों के निशान लिए जाते हैं।
नवजात की फाइल में ही ये कागज लगा दिया जाता है। चूंकि, घटनास्थल के आसपास कुछ घरों में सीसीटीवी कैमरे लगे हैं। एक-दो दिन पहले ही नवजात का जन्म होने का अनुमान है। ऐसे में पुलिस चार-पांच दिनों में अस्पताल के जन्म लेने वाले बच्चों का रिकॉर्ड और सीसीटीवी फुटेज खंगाले तो बच्ची को फेंकने वालों की शिनाख्त हो सकती है।
प्रतिदिन जन्म लेते हैं 90 से 100 बच्चे
स्वास्थ्य विभाग के हेल्थ मैनेजमेंट इन्फॉर्मेशन सिस्टम (एचएमआईएस) पोर्टल पर दर्ज आंकड़ों की मानें तो झांसी में हर साल 35 हजार से अधिक बच्चे जन्म लेते हैं। जिले में मेडिकल कॉलेज, महिला अस्पताल, सीएचसी, पीएचसी समेत 30 से अधिक नर्सिंगहोमों में डिलीवरी होती है। इन अस्पतालों में औसतन रोजाना 90 से 100 बच्चे जन्म लेते हैं।