झांसी। कोरोना संक्रमण के चलते रद्द की गईं सीबीएसई की 10वीं की बोर्ड परीक्षाओं का परिणाम तैयार करने का जिम्मा स्कूलों पर छोड़ा गया है। इसे लेकर स्कूल संचालकों ने सहमति जताई है। अब स्कूलों के हाथ में विद्यार्थियों के भविष्य की बागडोर है। संक्रमण काल में हुई ऑनलाइन पढ़ाई के बीच विद्यार्थियों के लिए अच्छे अंक पाना अब चुनौती नहीं बनेगा।
दरअसल, सीबीएसई बोर्ड ने कोरोना संक्रमण के चलते चार मई से होने वाली सीबीएसई की परीक्षाओं को रद्द कर दिया था। इसके बाद बोर्ड ने स्कूलों ने विद्यार्थियों का पूरा डाटा मांगा था। शनिवार को बोर्ड की ओर से 10वीं के विद्यार्थियों के लिए नई मार्किंग स्कीम जारी की गई। जिसके आधार पर स्कूलों को टर्म टेस्ट, प्री बोर्ड परीक्षाओं को पिछले वर्ष के परिणाम के आधार पर विद्यार्थियों के अंक तय करने हैं। इसके लिए स्कूल को प्रधानाचार्य की अध्यक्षता में आठ सदस्यीय कमेटी का गठन करना है। जिसमें पांच विषयों के शिक्षक और दो अन्य स्कूल के शिक्षक होंगे। इसे लेकर स्कूल संचालकों ने सहमति जताई है। स्कूल संचालकों का कहना है कि बोर्ड ने स्कूलों पर भरोसा जताया है। जिसके जरिए हर विद्यार्थी को उसके प्रदर्शन के अनुरूप अंक मिल सकेंगे। अल्पाइन स्कू ल के निदेशक दीपक राय कहते हैं कि स्कूल को अपने यहां के हर विद्यार्थी की क्षमता की बेहतर जानकारी होती है। शिक्षकों का विद्यार्थियों से सीधा जुड़ाव होता है। बोर्ड के निर्देशों के अनुरूप समिति बनाने की तैयारी चल रही है। सीबीएसई की जिला समन्वयक प्रीति खत्री का कहना है कि स्कूलों को निर्देशों के अनुरूप परिणाम तैयार करना है। जिसका बोर्ड द्वारा विश्लेषण किया जाएगा। इस पहल से विद्यार्थियों के साथ पक्षपात नहीं हो सकेगा।
आईसीएसई ने भी जारी की नीति
सीबीएसई बोर्ड की तरह आईसीएसई बोर्ड ने भी 10वीं के परिणाम को लेकर नीति जारी कर दी है। जिसके मुताबिक स्कू लों से हर विद्यार्थी का पिछले वर्ष और नौवीं कक्षा का परिणाम मांगा गया है। जिसे स्कूलों को 15 मई तक बोर्ड की वेबसाइट पर अपलोड करना है। बोर्ड के जिला समन्वयक नितिन विलियम्स ने बताया कि बोर्ड की नीति से विद्यार्थियों का भविष्य बेहतर हो सकेगा। हर विद्यार्थी अपनी क्षमता और योग्यता के मुताबिक अंक पा सकेगा।