झांसी। जनपद में 29 हजार से अधिक इंडिया मार्का हैंडपंप तो लगे हैं लेकिन इनसे निकलने वाले पानी की जांच नहीं हो रही है। इसलिए लोग इन हैंडपंपों का पानी पीकर बीमार भी हो सकते हैं। कोई भी हैंडपंप दूषित पानी उगल सकता है। हाल यह है कि हैंडपंप लगाने वाला जल निगम भी जांच से हाथ खड़े कर रहा है। इस ओर से अफसर भी उदासीन हैं।
जनपद की आधी से अधिक आबादी हैंडपंप के पानी पर निर्भर है। खासकर गर्मियों में तो एक- एक हैंडपंप जीवनदायिनी का काम करता है। जनपद में बबीना, बड़ागांव, चिरगांव, मोंठ, मऊरानीपुर, गुरसराय, बंगरा और बामौर ब्लाक में 22,751, मऊरानीपुर, समथर, गुरसराय, चिरगांव नगरपालिका, मोंठ, गरौठा, बड़ागांव, कटेरा, टोड़ी फतेहपुर, एरच नगर पंचायत में 2695 व महानगर में 3700 हैंडपंप लगे हैं। पानी की जांच के बाद ही इन हैंडपंपों को लगाया गया लेकिन अब इनसे निकलने वाले पानी की किसी भी स्तर पर जांच नहीं की जा रही है। जबकि, नियम के तहत हर साल हैंडपंपों के पानी की जांच होना चाहिए। जांच में यदि पानी में मौजूद पौष्टिक तत्व मानक के विपरीत हैं तो हैंडपंप पर रेडमार्क (लाल निशान) से क्रास का चिह्न इंगित करना चाहिए जिससे लोग जान सकें कि हैंडपंप का पानी पीने योग्य नहीं है।
छह मई को अपर जिला अधिकारी की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में संबंधित अधिशासी अधिकारी, खंड विकास अधिकारियों को अपने क्षेत्र के गांवों में जाकर भ्रमण करने के निर्देश दिए गए थे। ताकि खराब हैंडपंपों को ठीक कराया जा सके। साथ ही जो हैंडपंप रीबोर योग्य हैं उनको जलसंस्थान अधिशासी अभियंता व जिला पंचायत राज अधिकारी से समन्वय स्थापित कर ंठीक कराना था। अधिशासी अधिकारी 14 वें वित्त से धनराशि उपलब्ध कराएंगे। मगर, पानी की जांच पर कोई दिशा-निर्देश नहीं दिए गए। पानी की जांच न होने से लोगों को यह पता नहीं चल पा रहा है कि हैंडपंप का पानी पीने योग्य है अथवा नहीं।
जल निगम पानी की जांच करवाने के बाद ही हैंडपंप लगवाता है। इसके बाद देखरेख की जिम्मेदारी ग्राम पंचायतों की होती है। जिला विकास अधिकारी ने ग्राम पंचायतों को हर छह माह में हैंडपंपों की रिपोर्ट देने के निर्देश दे रखे हैं। अगर किसी हैंडपंप में दूषित पानी की शिकायत आती है तो उसे लाल निशान लगाकर बंद कर दिया जाता है। फिलहाल कोई शिकायत अभी उनके पास नहीं है।
कौशल किशोर, अधिशासी अभियंता, जल निगम।
वैसे पानी की जांच का काम जल निगम करता है। हालांकि, अभी तक इस तरह की कोई शिकायत नहीं आई है। सामान्य हैंडपंप व रीबोर की शिकायतें आ रही हैं, उन पर काम चल रहा है। बबीना व बंगरा ब्लाक में जलस्तर गिरने से सबसे ज्यादा हैंडपंप रीबोर की मांग आ रही है। उग्रसेन सिंह यादव, जिला विकास अधिकारी।
आमतौर पर हैंडपंप व ट्यूबवेल के पानी की जांच की आवश्यकता नहीं पड़ती है। क्योंकि जल निगम पानी की जांच के बाद ही इनको लगवाता है। कहीं से अगर शिकायत मिलती है तो उसकी जांच अवश्य करवाते हैं। साथ ही पाइप लाइन के जरिये दिए जाने वाले पानी की जांच प्रतिदिन की जा रही है। कुलदीप सिंह, अधिशासी अभियंता।
पानी की जांच के लिए अलग इकाई होती है। यहां पर कैसी व्यवस्था है? इसका पता किया जाएगा। साथ ही जल्द ही पानी की जांच शुरू करवाई जाएगी।
शिवसहाय अवस्थी, जिलाधिकारी।
धड़ाधड़ खराब हो रहे हैं हैंडपंप
बबीना ब्लाक के 2431 हैंडपंप में 44 सामान्य खराब मरम्मत व छह रीबोर, बड़ागांव ब्लाक के 2038 हैंडपंप में 41 सामान्य मरम्मत व 33 रीबोर, चिरगांव ब्लाक के 2606 हैंडपंप में 12 सामान्य मरम्मत व 46 रीबोर, मोंठ ब्लाक के 3066 हैंडपंप में 74 सामान्य मरम्मत व 96 रीबोर, बंगरा ब्लाक के 3472 हैंडपंप में 47 सामान्य मरम्मत व 69 रीबोर, मऊरानीपुर ब्लाक में 2834 हैंडपंप में 89 सामान्य मरम्मत व 290 रीबोर, गुरसराय ब्लाक के 2972 हैंडपंप में 9 सामान्य मरम्मत व 96 रीबोर तथा बामौर ब्लाक के 3332 हैंडपंप में 42 सामान्य मरम्मत व 41 रीबोर मांग रहे हैं।
मऊरानीपुर नगर पालिका के 608 हैंडपंप में पांच सामान्य मरम्मत, छह रीबोर, समथर नगर पालिका के 379 हैंडपंप में 10 सामान्य मरम्मत व 78 रीबोर, गुरसराय नगर पालिका के 506 हैंडपंप में एक सामान्य मरम्मत व 10 रीबोर, बरुआसागर के 242 हैंडपंप में 117 सामान्य मरम्मत व 18 रीबोर, मोंठ नगर पंचायत के 110 हैंडपंप के तीन रीबोर, गरौठा नगर पंचायत के 128 हैंडपंप में तीन सामान्य मरम्मत व तीन रीबोर, बड़ागांव नगर पंचायत के 90 हैंडपंप में एक रीबोर, कटेरा नगर पंचायत के 132 हैंडपंप में छह सामान्य मरम्मत व छह रीबोर, टोड़ी फतेहपुर नगर पंचायत के 148 हैंडपंप में 36 सामान्य मरम्मत व 11 रीबोर, एरच नगर पंचायत के 129 हैंडपंप में 12 सामान्य मरम्मत व तीन रीबोर तथा रानीपुर नगर पंचायत के 116 हैंडपंप में दो सामान्य मरम्मत व चार रीबोर मांग रहे हैं। महानगर में 3700 हैंडपंप स्थापित हैं। इनमें से एक हजार से अधिक हैंडपंप ऐसे पेयजल समस्याग्रस्त क्षेत्रों में स्थित हैं, जिनमें अभी एक चौथाई हैंडपंप ही काम कर रहे हैं।
हैंडपंप के पानी में अगर पौष्टिक तत्व नहीं हैं तो इससे कई बीमारियां हो सकती हैं। इनमें बुखार, टाइफाइड, उल्टी दस्त, किडनी संक्रमण हो सकते हैं। गंजापन भी हो सकता है। ऐसे पानी को उबालने के बाद ठंडा करके पीना चाहिए। - डा. डीएस गुप्ता, वरिष्ठ फिजीशियन, जिला अस्पताल।