पानी की कमी के कारण गेहूं की बुवाई में आ रही दिक्कत को देखते हुए बेतवा नहर का संचालन एक सप्ताह और बढ़ा दिया गया है। अब नहर दो दिसंबर को बंद होगी। गुरसराय नहर भी सिल्ट सफाई के बाद फिर से शुरू कर दी गई है।
रबी की फसल सीजन की मुख्य फसल गेहूं है। इस बार बरसात में कम बारिश होने के कारण खेतों में नमी नहीं आई है। इसलिए बुवाई करने में किसानों को दिक्कत आ रही है। परेशानी को देखते हुए प्रशासन ने नहरों का संचालन करवाया। 15 अक्तूबर से गुरसराय नहर चल रही थी, लेकिन सिल्ट के कारण किसानों को दिक्कत हो रही थी। विधायक जवाहर लाल राजपूत ने सिल्ट सफाई कराने की मांग की तो 13 नवंबर को नहर बंद कर सिल्ट सफाई कराई गई। 23 नवंबर से फिर से नहर खोल दी गई है।
वहीं, पारीछा बांध से निकली बेतवा नहर का संचालन एक सप्ताह के लिए बढ़ा दिया गया है। अभी यह नहर 26 नवंबर को बंद होनी थी, लेकिन इसे दो दिसंबर तक बढ़ा दिया गया है। दूसरी ओर पहूज बांध में पानी की कमी को देखते हुए अंगूरी बैराज से पानी लाकर दतिया नहर से भरा गया है। झांसी प्रखंड बेतवा नहर चतुर्थ मंडल सिंचाई के अधिशासी अभियंता संजय कुमार ने बताया कि सिंचाई के दौरान पानी की बर्बादी न हो इसके लिए उचित ऊंचाई पर लगाकर कुलावा बंद कर दें। पानी न मिलने पर अथवा नहरों से खांदी कटिंग होने पर अवर अभियंता, सींचपाल या जिलेदार को तत्काल सूचना दें।
गढ़मऊ व बड़वार नहर नहीं चलेगी
गढ़मऊ और बढ़वार नहर पानी की कमी के कारण इस साल नहीं चलाई जाएंगी। गढ़मऊ नहर से पालर, मड़ोरा, बड़ागांव और गढ़मऊ गांव के खेतों में सिंचाई होती है, जबकि बढ़वार झील से बिजौरा, भगवंतपुरा, चंदपुरा, गौना, हैवतपुरा, वीरपुरा, हीरानगर और मगरवारा गांव के खेतों में सिंचाई होती है। लेकिन, पानी की कमी के कारण अबकी बार यह नहरें नहीं चलेंगी। दोनों नहरों से पांच हजार हेक्टेयर क्षेत्र की सिंचाई प्रभावित होगी।