रिजर्व बैंक से जनपद के बैंकों को रुपये न भेजे जाने से करेंसी की किल्लत बढ़ने की आशंका है। नए वित्तीय वर्ष का एक महीना गुजरने के बाद भी रकम न आने से लोगों की परेशानी बढ़ने लगी है। रोजाना होने वाले कारोबार से आए रुपये से बैंकों ने किसी तरह यह महीना काट लिया है। लेकिन आगे मुश्किल गहरा सकती है।
बैकों में नकदी की कमी सरकारी क्रय केंद्रों पर फसल बेचने वाले किसानों को परेशान कर रही है। किसान अच्छे दाम की उम्मीद में सरकारी क्रय केंद्रों पर फसल बेच रहे हैं, लेकिन वहां से मिलने वाले चेक को कैश कराने में उन्हें पसीने छूट रहे हैं। शहरी बैंकों में रकम उपलब्ध होने से किसी तरह काम चल रहा है, लेकिन ग्रामीण इलाकों में स्थिति ठीक नहीं है। कई किसान इस परेशानी से बचने के लिए सरकारी खरीद केंद्रों की बजाय व्यापारियों को अनाज बेच रहे हैं। वहीं, दूसरी ओर सहालग का मौसम होने से शादी-ब्याह वाले घरों में भी रुपयों की आवश्यकता पड़ रही है।
बैंक अधिकारियों के मुताबिक जनपद में रोजाना बैंकों से तीन करोड़ रुपये का कारोबार होता है, लेकिन करेंसी की किल्लत के चलते यह घटकर अस्सी लाख रुपये पर पहुंच गया है। यह रकम भी व्यापारियों व आम लोगों द्वारा बैंकों में जमा करने पर मिल रही है। आरबीआई को भेजी गई डिमांड में जनपद के बैंकों की हालत के बारे में अवगत करा दिया गया है, लेकिन इसके बावजूद भी अभी तक करेंसी नहीं भेजी गई है। अगर कुछ दिनों में करेंसी नहीं भेजी गई, तो परेशानी बढ़ सकती है।
हर जगह किल्लत
बैंक अधिकारियों के अनुसार रिजर्व बैंकों में करेंसी की किल्लत केवल झांसी में ही नहीं है, बल्कि प्रदेश के अन्य जनपद सहित अन्य प्रदेशों में भी यही हालत हैं। जनपद के सीमावती मध्य प्रदेश के कस्बों में तो बैंकों में तय रकम ही दी जा रही है। इसलिए मध्य प्रदेश के कई लोग झांसी आकर बैंकों से लेनदेन कर रहे हैं।
आरबीआई से पत्राचार जारी
नए वित्तीय वर्ष में अभी तक रिजर्व बैंक से करेंसी नहीं भेजी गई है। आरबीआई से लगातार पत्राचार किया जा रहा है। हालांकि, अभी पर्याप्त मात्रा में बैंकों के पास रकम उपलब्ध होने से लोगों को परेशान होने की जरूरत नहीं है। उम्मीद की जा रही है, कि जल्द ही करेंसी भेजी जाएगी।
- आरके वर्मा, रीजनल मैनेजर स्टेट बैंक ऑफ इंडिया