झांसी। कोविड प्रोटोकॉल की वजह से इस बार का विधानसभा चुनाव एकदम अलग अंदाज में होगा। न रैलियों का शोर होगा और न ही रोड शो की गहमागहमी। नेता वर्चुअल रैली संबोधित करेंगे। इसके अलावा प्रत्याशी भी भारी भरकम भीड़ के साथ प्रचार के लिए नहीं निकल सकेंगे। एक साथ पांच लोग ही घर-घर जाकर प्रचार कर सकेंगे। फिलहाल, निर्वाचन आयोग की ओर से ये बंदिशें 15 जनवरी तक के लिए लगाई गईं हैं। लेकिन, कोरोना के मामलों में लगातार हो रहे इजाफे के चलते माना जा रहा है कि आगे भी ये नियम लागू रहेगा। चुनाव का बदला हुआ रूप प्रत्याशियों व पार्टी के नेताओं के लिए किसी चुनौती से कम साबित नहीं होने वाला है। हालांकि, सभी दलों के नेताओं का कहना है कि वे इसके लिए पूरी तरह से तैयार हैं। महामारी से आम जनमानस की सुरक्षा उनकी पहली प्राथमिकता है।
भारतीय जनता पार्टी अपना आईटी का सिस्टम पहले ही विकसित कर चुकी है। जूम एप पर जोड़कर हम बड़ी-बड़ी रैलियां कर सकते हैं। एक बार में एक-डेढ़ लाख लोगों तक को जोड़ सकते हैं। जबकि, स्थानीय स्तर पर चार-पांच हजार लोगों को जोड़कर रैली कर सकते हैं।
- मुकेश मिश्रा, महानगर अध्यक्ष - भाजपा
समाजवादी पार्टी ने हमेशा से ही तकनीकी को बढ़ावा देने का काम किया है। इसी के चलते पिछली सपा सरकार में लाखों विद्यार्थियों को लैपटॉप उपलब्ध कराए गए थे। ऐसे में सपा को चुनाव के बदले हुए स्वरूप में प्रचार करने में किसी तरह की दिक्कत नहीं होगी। पार्टी इसके लिए पूरी तरह से तैयार है।
- तनवीर आलम, महानगर अध्यक्ष - सपा
कांग्रेस पहले ही समझ चुकी थी कि चुनाव दूसरे ढंग से होने वाला है। उसी हिसाब से पहले से ही तैयार कर ली गई थी। कार्यकर्ताओं के प्रशिक्षण में वर्चुअल मीटिंग पर फोकस किया गया था। हमारे वार्ड स्तर के कार्यकर्ता भी इसके लिए प्रशिक्षित हैं। कोविड नियमों के अनुसार ही चुनाव लड़ा जाएगा।
- अरविंद वशिष्ठ, शहर अध्यक्ष - सपा