झांसी। महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज में पासआउट जेआर और एसआर को मानदेय के तौर पर 1.18 करोड़ रुपये बांट देने के मामले की जांच कमेटी ने शुरू कर दी है। कमेटी ने भुगतान किए गए डॉक्टरों और मानदेय के पैसे की पूरी सूची तलब की है। जिन डॉक्टरों से पैसे वापस नहीं मिलेंगे, उसकी रिकवरी बाबू से की जाएगी।
मेडिकल कॉलेज में वित्तीय अनियमितता का खुलासा अमर उजाला ने 26 अक्तूबर को प्रकाशित अपने अंक में किया था। खबर में बताया गया था कि वर्ष 2016 से 2018 बैच के जूनियर डॉक्टरों को आठ महीने तक भुगतान किया जाता रहा। इसके अलावा पासआउट कुछ सीनियर रेजिडेंटों को भी मानदेय दिया जाता रहा। बताया गया कि सीनियर रेजिडेंट का मानदेय प्रतिमाह 80 हजार और जूनियर रेजिडेंट को करीब 70 हजार दिया जाता है। इस मामले में एक करोड़ से अधिक रुपये मेडिकल कॉलेज के खाते से निकल गए।
अमर उजाला में खबर प्रकाशित होने के बाद हड़कंप मच गया। जांच समिति का गठन हुआ। बुधवार को जांच समिति की पहली बैठक हुई। समिति ने भुगतान होने वाले पैसे से लेकर पासआउट डॉक्टरों की सूची तलब की है। सूची मिलने के बाद कमेटी अपनी जांच आगे बढ़ाएगी। वहीं, प्रारंभिक जांच में समाने आया है कि बाबू स्तर से ही यह वित्तीय अनियमितता की गई है। ऐसे में बाबू पर कार्रवाई तय मानी जा रही है। वहीं, जिन डॉक्टरों से भुगतान हुआ पैसा वापस नहीं मिलेगा, उसकी रिकवरी बाबू से होगी।
कमेटी ने अपनी पहली जांच शुरू कर दी है। पहली बैठक में भुगतान किए गए पैसे का डॉक्टरों के नाम सहित सूची मांगी गई है। डॉक्टरों से बात कर पैसा वापस मंगाया जा रहा है। उम्मीद है कि सभी पैसा वापस कर देंगे। यदि किसी से पैसा वापस नहीं मिलता है तो संबंधित बाबू से रिकवरी की जाएगी। - डॉ. एनएस सेंगर, उप प्राचार्य एवं अध्यक्ष, जांच समिति।