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नए पौधे सहेज नहीं पाए, पुरानों में लगा दी आग

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झांसी। महानगर को हरियाली से सराबोर करने के दावों की अफसरों की कारगुजारी ने हवा निकाल दी। वन महोत्सव में एक साथ 50 लाख पौधे लगाने वाले अफसर नई पौध को सहेजने में तो नाकाम रहे ही हैं, वहीं पुराने पेड़ों को भी आग के हवाले किया जा रहा है। महानगर में पौधों की बेकदरी को लेकर लोगों में आक्रोश भी है। वहीं अफसर पौधों की जिंदगी बचाने को लेकर संजीदा नहीं हैं।
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वन महोत्सव के तहत नगर निगम ने मंसूरियन कब्रिस्तान में 600 पौधे लगाने का दावा किया। अमर उजाला ने पड़ताल की, तो सामने आया कि यहां पूरे पौधे लगे ही नहीं हैं। आधे पौधे लगाकर कोरम पूरा कर लिया गया। वहीं कब्रिस्तान में तैनात कर्मचारी ने बताया कि निगम से जो अधिकारी पौधे लेकर आए थे, वो सूखे ही थे। इसको लेकर जब कहा गया तो जवाब मिला कि बदलवा देंगे। लेकिन फिर कोई लौटकर सुध लेने भी नहीं आया।
उधर, किले के पास कूड़े के सहारे पेड़ों को आग लगाई जा रही है। इसके चलते पेड़ों के पौधे जल गए और हरियाली गायब हो गई है। एनजीटी के निर्देश हैं कि ऐतिहासिक इमारतों के पास और महानगर में कहीं भी कूड़ा नहीं जलाया जाएगा, लेकिन किले के पास धड़ल्ले से कूड़ा जल रहा है और पेड़ खाक हो रहे हैं। इससे साफ है कि हरियाली के दावे करने वाले अफसर सीएम के ड्रीम को तोड़ रहे हैं। पूर्व राज्यमंत्री रवींद्र शुक्ल का कहना है कि मैनें वर्षों पूर्व किले के पास पौधे लगवाए थे। जो पेड़ बनकर हरियाली बिखेर रहे थे, लेकिन अब कूड़े में आग लगने से पेड़ जल गए हैं। इसे लेकर डीएम को पत्र भी लिखा, लेकिन कुछ नहीं हुआ। वहीं मामले में नगर निगम अधिकारियों से वार्ता करने का प्रयास किया गया, लेकिन बात नहीं हो सकी।
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