झांसी। किसानों की आमदनी बढ़ाने के लिए बुंदेलखंड को ड्रैगन फ्रूट का हब बनाने की तैयारी है। रानी लक्ष्मीबाई केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय ने महाराष्ट्र, बंगाल व गुजरात से ड्रैगन फ्रूट के पौधे मंगवाए हैं। इनमें से बुंदेलखंड की परिस्थिति के अनुकूल उच्च किस्म के पौधे का चयन किया जाएगा। अगले साल से किसानों को इसकी खेती के लिए बीज देना शुरू कर दिया जाएगा। कृषि वैज्ञानिकों का दावा है कि एक एकड़ में ड्रैगन फ्रूट लगाकर चार लाख तक मुनाफा कमाया जा सकता है।
ड्रैगन फ्रूट को क्वीन ऑफ द नाइट कहा जाता है। इस फल की ज्यादातर विदेशों में ही खेती की जाती है। भारत में महाराष्ट्र, बंगाल, गुजरात के अलावा उत्तर प्रदेश के मेरठ, नोएडा समेत चुनिंदा जनपदों में कुछ जगहों पर इसकी खेती होती है। पौधा लगाने के दस महीने बाद इसमें फूल आने लगते हैं। इसके 35 दिन बाद कटाई कर ली जाती है। चूंकि, इसकी खेती में बहुत कम पानी की जरूरत पड़ती है। ऐसे में यह बुंदेलखंड की परिस्थिति के अनुकूल है। इसी वजह से रानी लक्ष्मीबाई केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय ने बुंदेलखंड में ड्रैगन फ्रूट की खेती के लिए कई पौधे मंगवाए हैं। विश्वविद्यालय के फल विज्ञान विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. रंजीत पॉल ने बताया कि बुंदेलखंड के लिए मुफीद किस्म पर रिसर्च जारी है। उच्च किस्म के पौधे का चयन कर वर्ष 2022 से किसानों को बांटना शुरू कर दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि एक एकड़ क्षेत्र में 450-500 पौधे लगाए जाते हैं। दो से तीन साल बाद आर्थिक उपज मिलनी शुरू हो जाएगी। तीन साल में एक पौधे से 30 किलो तक फ्रूट मिलेगा। मौजूदा समय में यह 100-200 रुपये किलो तक बिकता है। एक एकड़ में ड्रैगन फ्रूट की खेती करके चार लाख रुपये तक की कमाई की जा सकती है। इसके पौधे और फल दोनों बिकते हैं।
कई खासियत हैं, ऐसे लगाते
पांच फुट के प्रत्येक पिलर के चारों तरफ एक-एक पौधा लगाया जाता है। यह पौधा पिलर के सहारे ऊपर की ओर बढ़ता जाता है। इस फल की बहुत खासियत हैं। इसमें एंटी ऑक्सीडेंट अधिक रहता है। जो कि कैंसर होने से रोकता है। वहीं, पोटेशियम की मात्रा भी ज्यादा रहती है। इससे ब्लड प्रेशर नियंत्रित रहता है। हानिकारक बैक्टीरिया भी नहीं होने देता है।
खेती कर पास के शहरों में बेच सकते
ड्रैगन फ्रूट की खेती करके किसान इसे पास के शहरों कानपुर, लखनऊ, भोपाल, दिल्ली आदि में बेच सकते हैं। इसकी मांग लगातार बढ़ती जा रही है। खासकर फाइव स्टार होटलों में यह फ्रूट ज्यादा मिलता है। मांग के अनुसार अभी कम उपज होती है।
प्रधानमंत्री मोदी दे चुके जोर
केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय के वर्चुअल लोकार्पण के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ड्रैगन फ्रूट की खेती पर जोर दे चुके हैं। उन्होंने विश्वविद्यालय के अधिकारियों से भी इसकी खेती को लेकर लोगों को जागरूक करने की बात कही थी। इसी क्रम में विश्वविद्यालय ने प्रयास शुरू कर दिए हैं।
किसानों की आय दोगुनी करने में ड्रैगन फ्रूट बेहद अहम कड़ी साबित होगा। वर्ष 2022 से किसानों को ड्रैगन फ्रूट के पौधे देने शुरू कर दिए जाएंगे। कम पानी की फसल होने की वजह से यह बुंदेलखंड की परिस्थिति के लिए बिल्कुल उपयुक्त है। - डॉ. अरविंद कुमार, कुलपति, रानी लक्ष्मीबाई केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय।