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सोशल मीडिया पर फिर छिड़ा बुंदेलखंड राज्य बनने का मुद्दा

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झांसी। बुंदेलखंड को राज्य बनाने की संभावना के संदेश फिर से सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं। इसमें बुंदेलखंड का नक्शा और इसमें शामिल होने वाले जिलों की सूची की पोस्ट खूब दौड़ रही है। अलग राज्य बनने के वायरल हो रहे संदेशों को देख बुंदेलियों का उत्साह बढ़ रहा है। मगर पृथक बुंदेलखंड में प्रयागराज को राजधानी बनाने की बात पर आक्रोश भी है।
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सोशल मीडिया पर वायरल हुए संदेश में दिखाए गए नक्शे में पृथक बुंदेलखंड राज्य में कानपुर, झांसी, चित्रकूट और मिर्जापुर मंडल के जिले इस राज्य के अंग दिखाए गए हैं। सोशल मीडिया पर वायरल होते संदेश को लेकर बहस भी छिड़ गई है। बुंदेलखंड राज्य के समर्थक नेताओं का कहना है कि प्रयागराज, कानपुर और मिर्जापुर बुंदेलखंड के हिस्सा नहीं है। अगर प्रयागराज राजधानी बनेगी, तो बुंदेलखंड का पहले की तरह ही शोषण होता रहेगा। जबकि पुराने बुंदेलखंड में उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश दोनों राज्यों के जिले शामिल हैं।
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अखंड बुंदेलखंड के अलावा कुछ भी स्वीकार नहीं होगा। इनमें उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के 14 जिले शामिल हैं। मध्य प्रदेश के बिना बुंदेलखंड राज्य अधूरा है और इससे छेड़छाड़ बर्दाश्त नहीं होगी।
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भानु सहाय अध्यक्ष, बुंदेलखंड निर्माण मोर्चा।
बुंदेलखंड राज्य की राजधानी झांसी बननी चाहिए। उप्र व मप्र के बुंदेलखंड वाले जिलों के मिलने पर ही बुंदेलखंड का कल्याण होगा। अगर प्रयागराज ही राजधानी बना दी गई तो बुंदेलखंड का शोषण होता रहेगा।
डॉ. बाबूलाल तिवारी, पूर्व अध्यक्ष बुंदेलखंड मुक्ति मोर्चा।
प्रयागराज, कानपुर, मिर्जापुर बुंदेलखंड का हिस्सा नहीं है। इस तरह के राज्य बनने से बुंदेलखंड को कोई लाभ नहीं होगा। सरकारी मुख्यालयों का हब प्रयागराज और औद्योगिक हब कानपुर बनकर रह जाएगा।
सत्येंद्र पाल सिंह, अध्यक्ष बुंदेलखंड क्रांति दल।
बुंदेलखंड की एक अपनी अलग संस्कृति एवं भाषा और पहचान है। प्रयागराज, कानपुर और मिर्जापुर को मिलाना कतई बर्दाश्त नहीं होगा। बुंदेलखंड राज्य बनने पर मध्य प्रदेश के 7 जिले शामिल होने चाहिए।
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दिनेश भार्गव, केंद्रीय महामंत्री बुंदेलखंड मुक्ति मोर्चा।
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