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मध्यप्रदेश में खूब गिरफ्तार हो रहे बुंदेलखंड के माफिया-गैंगस्टर, लपक लेती है वहां की पुलिस

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माफिया - फोटो : ??????
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झांसी। अब या तो मध्यप्रदेश की पुलिस यूपी पुलिस के मुकाबले काफी तेज और एक्टिव है या फिर...कुछ और। खैर जो भी है लेकिन बुंदेलखंड के जिन माफिया और गैंगस्टर को उत्तर प्रदेश की खाकी दिन रात तलाश रही होती है वह मध्यप्रदेश में गिरफ्तार हो जाते हैं। चाहें वह चार लोगों की हत्या के आरोपियों की गिरफ्तारी हो या फिर सराफा कारोबारी के अपहरण में नामजद माफिया अजय जड़ेजा की गिरफ्तारी। तीन करोड़ की बीमा रकम हड़पने के लिए दोस्त की हत्या करने वाला टीवीएस का सब डीलर हो । दो लाख के इनामी क्रिमिनल सरदार सिंह को भी झांसी पुलिस महीनों से ढूंढ रही थी लेकिन पकड़ा मध्यप्रदेश पुलिस ने ही। अगर पिछले चार साल की बात करें तो जो भी चर्चित घटनाएं हुईं उनके क्रिमिनल एमपी में ही गिरफ्तार हुए हैं।
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कानपुर में आठ पुलिस वालों की हत्या करने वाले यूपी के मोस्टवांडेट अपराधी विकास दुबे को भी मध्यप्रदेश के उज्जैन में पकड़ा गया है। जबकि उसकी तलाश में भारी पुलिस फोर्स लगी थी। अब विकास की गिरफ्तारी को लेकर काफी हल्ला है। कहा जा रहा है कि यह सब एक प्लान बनाकर किया गया है।
झांसी में वह चर्चित मामले जिनके आरोपी मध्यप्रदेश पुलिस ने गिरफ्तार किए
वर्ष 2007 में झांसी में 4 लोगों की हत्या कर दी गई थी। दिनदहाड़े हुए इस हत्याकांड की गूंज लखनऊ तक पहुंची थी। एसटीएफ तक को लगाया गया था। लेकिन 30 मार्च को तीनों आरोपी मध्यप्रदेश में गिरफ्तार हो गए थे।
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- वर्ष 2017 में दो लाख के इनामी अपराधी सरदार सिंह के पीछे पूरे बुंदेलखंड की पुलिस लगी रही। आए दिन पता चलता कि वह पुलिस को चकमा देकर निकल भागा। उसे भी मध्यप्रदेश की पुलिस ने गिरफ्तार किया था।
- वर्ष 2018 में एक बड़े सराफा कारोबारी का अपहरण कर लिया गया था। यह मामला झांसी में खूब गूंजा था। लखनऊ से लेकर दिल्ली तक हल्ला मचा था लेकिन इस घटना के मास्टरमाइंड माफिया अजय जड़ेजा को ग्वालियर पुलिस ने गिरफ्तार किया था
- मार्च 2020 में एक कारोबारी ने तीन करोड़ की बीमा रकम हड़पने के लिए अपने दोस्त की हत्या कर दी थी। यह घटना भी झांसी पुलिस के लिए सिरदर्द बनी रही। पुलिस खुलासे में जुटी लेकिन नतीजा सिफर ही रहा। दोस्त की हत्या करने वाला कारोबारी ओरछा थाना क्षेत्र में गिरफ्तार हो गया था।
- 24 जनवरी 2020 को ट्रक मालिक की हत्या करके बदमाशों ने चना लूट लिया था। इस घटना के खुलासे को लेकर पुलिस ने काफी हाथ पांव मारे लेकिन बदमाश हाथ नहीं लगे। लेकिन मध्यप्रदेश पुलिस ने बदमाशों को दबोच लिया था।
तीन साल में आठ हिस्ट्रीशीटर भी एमपी में पकड़े गए
झांसी। तीन साल के भीतर आठ हिस्ट्रीशीटर बदमाशों को मध्यप्रदेश पुलिस ने गिरफ्तार किया। खास बात यह है कि इन बदमाशों की तलाश झांसी और ललितपुर पुलिस कर रही थी। लेकिन पता चला कि यह तो मध्यप्रदेश की जेल में बंद हैं। इन सभी आठ बदमाशों पर दस से पंद्रह तक मुकदमे दर्ज थे।
दिल्ली और मध्यप्रदेश में सबसे ज्यादा सरेंडर करते हैं यूपी के इनामी बदमाश
झांसी। पूर्व डीजीपी एके जैन का कहना है कि बदमाश पुलिस से बचने के लिए भी पास के राज्यों में सरेंडर कर देते हैं। इसके पीछे उनकी मंशा रहती है कि दूसरे राज्य की पुलिस मारेगी नहीं और लिखा पढ़ी में वह पुलिस कस्टडी में आ जाते हैं। कई बार पुलिस की सांठगांठ से भी सरेंडर हो जाते हैं। जब वह डीजीपी थे तब गाजियाबाद, मेरठ, बुलंदशहर, चित्रकूट, झांसी के कई बदमाशों ने इन जिलों में समर्पण कर दिया था।
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