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महोत्सव में दिखा साहित्य, संस्कृति का संगम

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बुंदेलखंड साहित्य महोत्सव में शास्‍त्रीय संगीत प्रस्तुत करती कलाकार।
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झांसी। क्राफ्ट मेला मैदान में आयोजित बुंदेलखंड साहित्य महोत्सव का दूसरे दिन कई विधाओं को समेटे रहा। एक ओर हिंदी नामा और तीखर समूह ने साहित्यिक परिचर्चा की। वहीं, ओपन माइक पर उदीयमान कलाकारों ने एक से बढ़कर एक प्रस्तुतियां दीं। बेबी शो समेत विभिन्न प्रतियोगिताएं भी आकर्षण का केंद्र रहीं।
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शनिवार को मंडलायुक्त सुभाषचंद्र शर्मा ने किसान संगोष्ठी का शुभारंभ किया। किसानों को जैविक खाद अपनाने के लिए प्रेरित किया। संयोजक डॉ. पुनीत बिसारिया ने सत्रों की जानकारी दी। प्रथम सत्र में बाजार और साहित्य पर चर्चा हुई। श्रीहरि त्रिपाठी ने कहा कि साहित्य जरूरी नहीं है कि बाजार के दबाव में काम करे। अगर वह समाज उपयोगी होगा तो पाठकों को स्वयं ढूंढ लेगा। दिनेश श्रीनेत्र, साकेत सहाय ने भी विचार रखे। विद्रोही वनिता परिचर्चा में प्रो. श्रद्धा सिंह, अंकिता जैन, ऋतु दुबे, डॉ. प्रीति यादव, डॉ. अचला पांडेय ने हिस्सा लिया। पत्रकार ऋचा अनिरुद्ध व नवीन कुमार आदि ने सोशल मीडिया: यानी हम भी पत्रकार हैं विषय पर परिचर्चा की। पर्यटन सत्र में प्रो. देवेश निगम, प्रो. प्रतीक अग्रवाल, डॉ. उमा पराशर, संतोष शर्मा और हितेश शर्मा ने साहित्य और पर्यटन के साथ विकास पर जोर दिया। इतिहास के झरोखे में बुंदेलखंड में हरगोविंद कुशवाहा, डा नीति शास्त्री, मुकुंद मेहरोत्रा, डॉ. पंकज शर्मा ने बुंदेली इतिहास के कई प्रसंगों से श्रोताओं को अवगत कराया। इस दौरान अपर आयुक्त सर्वेश दीक्षित, आयोजन सचिव चंद्र प्रताप सिंह, डॉ. रेखा लगरखा मौजूद रहीं।
बुंदेली वधू प्रतियोगिता में ऋचा अव्वल
महोत्सव में विभिन्न प्रतियोगिताएं हुईं। चित्रकला प्रतियोगिता में बुंदेली लोक संस्कृति पर प्रतिभागियों ने चित्र बनाए। बुंदेली वधू प्रतियोगिता में ऋचा कनकने प्रथम, सुरभि कनकने द्वितीय रहीं। रस्साकसी प्रतियोगिता बालक एवं बालिका वर्गों में हुई। इसमें पुरुषों का फाइनल पुलिस और बीयू के शारीरिक शिक्षा विभाग के छात्रों के बीच हुआ, जिसमें छात्र विजयी रहे। इस दौरान सुशीला शर्मा, नीलम गुप्ता, निरूपमा मोहन, सुमन राय, अलका जैन, सीता गुप्ता मौजूद रहीं। प्रो. सृष्टि माथुर द्वारा शास्त्रीय गायन, धर्मेंद्र और समूह द्वारा बुंदेली फाग, सविता यादव द्वारा हरदौल गायन प्रस्तुत किया।
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