झांसी। रासायनिक खादों के बेतहाशा इस्तेमाल व लगातार पानी की कमी से बुंदेलखंड की धरती की सेहत बुरी तरह से बिगड़ गई है। इसका सीधा दुष्प्रभाव जमीन की उपजाऊ क्षमता पर पड़ा है। कुदरत के कोप के शिकार क्षेत्र के किसानों के लिए इससे निपटना बड़ी चुनौती बना हुआ है। हालात यह हैं कि क्षेत्र की जमीन में पोषक तत्वों की भारी कमी पाई गई है।
बुंदेलखंड के किसानों की परेशानी कम होने का नाम नहीं ले रही है। सूखे की वजह से उत्पादन पहले से ही बहुत कम हुआ है, लेकिन आगे भी इसमें सुधार की गुंजाइश नजर नहीं आ रही है। इसकी वजह क्षेत्र की 86 प्रतिशत भूमि का बीमार होना है। यह खतरनाक स्थिति क्षेत्रीय भूमि परीक्षण प्रयोगशाला में झांसी मंडल के अलग-अलग स्थानों की मिट्टी के 18,200 नमूनों की जांच में सामने आई है।
इसमें मिट्टी में मुख्य पोषक तत्व जीवांश कार्बन (सूक्ष्म जीव) की भारी कमी पाई गई है। मिट्टी सेहत के लिए उसमें एक प्रतिशत जीवांश कार्बन का होना जरूरी है। यह तत्व मिट्टी में नमी बनाए रखते हैं तथा पौधों की वृद्धि में मदद करते हैं। लेकिन, यहां जमीन में पोषक तत्व बेहद कम औसतन 0.3 से 0.4 प्रतिशत ही पाए गए हैं। यह बुंदेलखंड की कृषि के भविष्य के लिए शुभ संकेत नहीं हैं।
साढ़े चार लाख हेक्टेअर जमीन की होगी जांच
झांसी। क्षेत्रीय मृदा परीक्षण प्रयोगशाला के सहायक निदेशक वी के सचान ने बताया कि प्रधानमंत्री मृदा स्वास्थ्य योजना के तहत मंडल में साढ़े चार लाख हेक्टेअर जमीन का स्वास्थ्य जांचा जाना है। इसके लिए 45 हजार नमूने एकत्र किए जाएंगे। अक्तूबर 2015 से अब तक 36,200 नमूने लिए जा चुके हैं।
सूक्ष्म जीव करते हैं खेती का विकास
झांसी। कृषि वैज्ञानिक डा. वी के सिंह के अनुसार खेती के लिए मिट्टी में रहने वाले सूक्ष्म जीवों की अहम भूमिका होती है। इनमें लंबे समय तक पानी को धारण करने की क्षमता होती है। इससे सिंचाई में पानी की कम आवश्यकता होती है, साथ ही फसल की वृद्धि भी अच्छी होती है।
ऐसे बढ़ सकते हैं जीवाश्म
झांसी। रासायनिक खाद व पानी की कमी सूक्ष्म जीवों के लिए खतरनाक साबित हो रही है। जीवांश कार्बन में बढ़ोत्तरी के लिए जैविक खादों का उपयोग करना होगा। इसमें प्रमुख गोबर व केंचुआ की खाद है। खेत में इनकी पर्याप्त उपलब्धता से अन्य सूक्ष्म जीव भी तेजी से बढ़ते हैं।