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बुंदेली छटा में रंगा महानगर

Sun, 27 Dec 2015 12:57 AM IST
ब्यूरो
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झांसी। दो वर्ष बाद ऐतिहासिक नगरी झांसी में एक बार फिर बुंदेली कला संस्कृति के कलाकार जुटे, जिन्होंने अपनी कला से लोगों को मंत्रमुग्ध कर दिया । अवसर था झांसी जन महोत्सव परंपरा के आगाज से पूर्व निकाली गई शोभायात्रा का।
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शोभायात्रा का शुभारंभ बुंदेली पगड़ी पहने मुख्य अतिथि डीआईजी अजय मोहन शर्मा, विशिष्ट अतिथि एसपी सिटी राजेश कुमार, सीओ सिटी कल्याण सिंह व मुख्य संयोजक राजीव राय ने रानी लक्ष्मीबाई पार्क के मुख्य द्वार से रमतूला व अन्य बुंदेली वाद्य यंत्रों क ी गूंज के बीच हरी झंडी दिखा कर किया।

इस मौके पर मुख्य अतिथि अजय मोहन शर्मा ने कहा कि महोत्सव की परंपरा को बनाए रखना एक अच्छा कदम है, जिसमें जनता की बड़ी भागीदारी है। इस तरह के आयोजनों से जहां लोक कलाकारों को प्रोत्साहन मिलता है, वहीं नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति की जानकारी मिलती है।
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मुख्य संयोजक राजीव राय ने कहा कि शोभायात्रा में बुंदेली छटा बिखेरने का पूरा प्रयास किया गया है। इसके लिए गांव-गांव जाकर विलुप्त होती परंपराओं व बुंदेली विधाओं के  कलाकारों का चयन किया गया।

शोभायात्रा में बुंदेली संस्कृति के कई रंग दिखे। विभिन्न झाकियों में जहां बुंदेली माटी में जन्मे प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के सेनानियों, क्रांतिकारियों, ऋषियों, साहित्यकारों के स्वरूपों को शामिल कर उन्हें सम्मान दिया गया, वहीं लोक संस्कृति से जुड़ी झांकियां शामिल रहीं।

रानी झांसी के दत्तक पुत्र दामोदर राव द्वारा निर्मित रानी झांसी का चित्र, मास्टर रुद्रनारायण, मैथिलीशरण गुप्त के  चित्र, घोड़ों पर चल रही रानी झांसी एवं उनकी साथी वीरांगनाएं, तात्या टोपे, वीर शिवाजी, बहादुर शाह जफर, मोर पंख से रामायण लिखते महर्षि वाल्मीकि, गोस्वामी तुलसी दास, लोक कवि ईसुरी, साहित्यकार वृंदावन लाल वर्मा के स्वरूप आकर्षण का केंद्र रहे।

मुख्य छटा में चंदा देवी व गोरेलाल के नेतृत्व में प्रस्तुत कर रही दीपा, परमा, साधना एवं उनके साथियों द्वारा बुंदेली राई नृत्य, तो सीताराम कुशवाहा एंड पार्टी के कलाकारों द्वारा महिला व विदूषक के स्वरूप में रावला नृत्य, गौरी शंकर सिरवैया एंड पार्टी के कलाकारों द्वारा कछियाई, ढिमरयाई गीत, गोटे व देवी भजन, आल्हा गायन करतीं विजया यादव एवं उनके साथी, तो लक्ष्मी नारायण कुशवाहा एंड पार्टी के कलाकारों द्वारा कमर में घुुंघरू एवं परंपरागत साफा बांध कर प्रस्तुत मौनिया नृत्य माहौल में चार चांद लगा रहा था।

बुंदेली धर्म संस्कृति की छटा बिखेर रहे रंजना विद्रोही एवं उनके साथियों द्वारा जवारों का प्रदर्शन, विवाह मंडप में मौर लगाए बैठा जोड़ा काफी सराहा गया। शोभायात्रा की झांकियों में अंग्रेजों से युद्धरत रानी झांसी, गुलाम गौस खां, राधा कृष्ण, बड़ा बाजार रामलीला कमेटी द्वारा प्रस्तुत झांकियों में राम को जूठे बेर खिलाती शबरी व नाव पार कराते केवटराज एवं बग्गी पर विराजमान तिरंगा लिए भारत माता के स्वरूप लोगों को लुभाते रहे।

खूब लड़ी मरदानी वो तो झांसी वाली रानी थी, मां तुझे सलाम आदि देश भक्ति गीतों के बीच शोभायात्रा खंडेराव गेट, मानिक चौक, बड़ा बाजार, सुभाष गंज से होती हुई रानी महल पहुंची। इस दौरान विभिन्न व्यापारिक व सामाजिक संगठनों के सदस्यों ने कई स्थानों पर पुष्प वर्षा कर स्वागत किया।

शोभा यात्रा के समापन पर रानी महल में हुई सभा में नगर आयुक्त अरुण प्रकाश ने कहा कि इस बार सभी संगठनों ने मिलकर बुंदेली संस्कृति एवं उसकी परंपरा को आगे ले जाने का बीड़ा उठाया है, जिसे पूर्ण सफल करना हम सभी का दायित्व है।

एसपी सिटी राजेश कुमार ने कहा कि बुंदेली कला संस्कृति सदैव ही लोगों को प्रभावित करती रही है। पूर्व मंत्री हरगोविंद कुशवाहा ने कहा कि बुंदेलखंड की भूमि में कई तपस्वियोें ने जन्म लिया है। सीओ सिटी कल्याण सिंह ने कहा कि महोत्सव ने बुंदेलखंड की सभी विधाओं को एक बार फिर मंच पर ला दिया है।
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