बुंदेली लोकगीतों पर जमकर नाचे मौनिया
झांसी। कार्तिक शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा सोमवार को ग्रामीण इलाकों और शहर के कई स्थानों पर बुंदेली लोक नृत्य मौनिया का आयोजन हुआ। इसमें युवा नर्तक अपने हाथों में लाठी, कमर में घुंघरू बांधकर बुंदेली लोक गीतों पर ढोलक की थाप पर नृत्य करते नजर आए। लोगों ने इस लोक संस्कृति का भरपूर आनंद लेते हुए उनका जमकर उत्साह भी बढ़ाया और उपहार भी दिये।
बुंदेलखंड की प्राचीन लोक नृत्य कला संस्कृति में मौनिया नृत्य का बड़ा महत्व है। इसे दिवारी नृत्य भी कहते हैं। इस नृत्य को देखने के लिए हर साल लोगों में खासा उत्साह रहता है। सोमवार को ग्रामीण इलाकों से आये मौनिया नर्तकों ने गोला कुआं, बड़ा बाजार, गंधीगर का टपरा, नंदनपुरा, किला मार्ग, मिनर्वा चौराहा, सीपरी, सदर, आवास विकास आदि इलाकों में नृत्य को खास अंदाज में प्रस्तुत किया। नर्तक अपने हाथों में मोर पंख लिए थे और रंग बिरंगे धागे से बने फुदके भी लटकाये थे। बरेदी बुंदेली गीत गा रहे थे। कई जगहों पर लोगों ने इन युवाओं का उत्साह बढ़ाते हुए आकर्षक उपहार भी दिये। मान्यता है कि यह नृत्य भगवान कृष्ण की भक्ति और गाय के संरक्षण पर आधारित है।
इधर गांधी मार्ग स्थित गोपाल जी महाराज के मंदिर में बुंदेली परिवेश में मौनिया नर्तकों ने अपनी मनमोहक प्रस्तुति दी और ढोलक और नगडियां की थाप पर जमकर नृत्य किया। इस अवसर पर मऊरानीपुर, निवाड़ी, सकरार, दतिया, करैरा आदि क्षेत्रों से आये मौनिया नर्तकों को पुरस्कृत किया गया। इस अवसर पर राधे चौबे, रवीश त्रिपाठी, अशोक तिवारी, अखिलश्ेा पांडेय, गोकुल दुबे आदि मौजूद रहे।