झांसी। बुंदेलखंड में मानसून कमजोर पड़ने की वजह से अब तक औसत से 50 फीसदी कम बरसात हुई है, इस कारण सूखे की आशंका पैदा हो गई है। हालांकि, धान को छोड़कर अन्य फसलों की लागत कम जरूर है लेकिन यह ही किसानों का भविष्य की तैयारी करती है। इन फसलों से किसानों को मुनाफा नहीं हुआ तो कई कर्जदार हो सकते हैं। उन्हें उधार लेकर आगामी फसलों के लिए बीज, डीजल आदि की खरीद करनी पड़ेगी।
बुंदेलखंड प्राकृतिक आपदाओं का शिकार रहता है। कभी यहां सूखा पड़ जाता है तो कभी ओलावृष्टि से फसलों को नुकसान होता है। इस बार समय से प्री मानसूनी बारिश की शुरूआत हो जाने के बावजूद सूखे जैसे हालात बने हुए हैं। जुलाई और अगस्त में पचास फीसदी बारिश ही हो पाई है। वहीं, जिलों की बात करें तो कुछ जगहों पर तीस फीसदी तक ही वर्षा हुई है। इस समय उड़द, मूंग, तिल, मूंगफली और धान की बुवाई की जा चुकी है। इनमें से तिल की फसल तो ठीक है लेकिन बाकी पर पानी न गिरने से असर पड़ा है। सबसे खराब हालत तो धान की है। बुंदेलखंड में मानसूनी सीजन 15 सितंबर तक होता है। ऐसे में अब निगाहें अगस्त और सितंबर पर टिकी हुई हैं। कृषि विशेषज्ञों के मुताबिक धान को छोड़कर बाकी फसलों की लागत काफी कम होती है मगर इनसे किसानों का भविष्य तय होता है। फसल से आमदनी होने पर किसान अक्तूबर में बोई जाने वाली अलसी, चना, मटर, मसूर, राई के लिए बीज, डीजल आदि का बंदोबस्त कर लेता है। इन फसलों से मुनाफा नहीं होने पर किसानों को उधार लेना पड़ता है।
पिछली बार ज्यादा बारिश से फसल हुई थी चौपट
इस मानसूनी सीजन में अब तक जो हालात बने हुए हैं, वैसे ही पिछले साल भी थे लेकिन अंतिम कुछ समय में ज्यादा पानी गिर गया था। इससे तिल और मूंग की फसल 60 से 70 प्रतिशत तक नष्ट हो गई थी, वहीं उड़द तो 90 फीसदी फीसदी से ज्यादा चौपट हो गई थी। इससे किसानों को काफी नुकसान हुआ था।
इस सप्ताह हल्की बारिश का पूर्वानुमान
मौसम वैज्ञानिक डॉ. मुकेश चंद्र ने बताया कि बुंदेलखंड में आगामी सप्ताह भी हल्की बारिश का पूर्वानुमान है। इस दौरान कभी रिमझिम तो कभी बूंदाबांदी हो सकती है। बादलों की आवाजाही के बीच धूप भी खिलने से उमस और गर्मी भी झेलनी पड़ सकती है।