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रोहित के सिर और पेट में अब भी फंसी गोली

Mon, 06 Nov 2017 01:01 AM IST
Jhansi
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crime news jhansi - फोटो : demo
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शनिवार तड़के उन्नाव गेट चौकी के पास मेवातीपुरा निवासी सुनंदा की उसके घर की चौखट पर गोली मारकर हत्या करने के बाद खुद को गोली मारने वाले रोहित की हालत गंभीर बनी है। उसके सिर और पेट में अभी भी गोली फंसी है, जिसे निकालने के लिए अभी तक ऑपरेशन नहीं हो सका है। वहीं पुलिस ने रोहित का मोबाइल अपने कब्जे में ले लिया है और उसके दोस्तों से भी पूछताछ शुरू कर दी है।
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जिंदगी से संघर्ष कर रहे पंचवटी कॉलोनी निवासी रोहित कुशवाहा की हालत पर चिकित्सकों की टीम लगातार नजर बनाए हुए है। संभावना चिकित्सक सोमवार को ऑपरेशन कर सकते हैं। रोहित की मेडिकल रिपोर्ट के बारे में मेेडिकल कॉलेज के चिकित्सक कुछ भी कहने से बच रहे हैं। मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डा. हरीशचंद्र आर्या ने तो यह कहकर अपना पल्ला झाड़ लिया कि इस मामले की उन्हें कोई जानकारी नहीं है।
एसपी सिटी देवेश पांडेय का कहना है कि पुलिस को मौके से तमंचा, पिस्टल, मोबाइल व तीन खोखे मिले थे। रोहित के मोबाइल को भी कब्जे में लिया गया है, इसकी कॉल डिटेल खंगालकर यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि सुनंदा और रोहित के बीच बातचीत होती थी या नहीं और रोहित असलहे कहां से लाया था। उसके कुछ करीबी दोस्तों को बुलाकर भी पूछताछ की गई है।
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कहीं गलत संगत में तो नहीं था?
पुलिस ने मौके से जो पिस्टल और तमंचा बरामद किया है, उसे आमतौर पर शातिर बदमाश उपयोग करते हैं। पुलिस के अनुसार बरामद किए गए तमंचे से 16 से 18 गज तक की दूरी पर फायर किया जा सकता है। पुलिस का कहना है कि आरोपी के कहीं बदमाशों से गलत संगत तो नहीं थी, इसकी जांच की जा रही है।
अजय पाल सिंह, कोतवाली प्रभारी

एकतरफा प्यार नहीं रेटोमेनिया
एकतरफा प्यार में जो हिंसक हो जाते हैं। वह वास्तव में प्यार नहीं होते, वह रेटोमेनिया नाम की बीमारी से ग्रसित होते है। इससे वह किसी भी हद तक जाने को तैयार रहते हैं। ऐसे में प्यार में नाकाम रहने पर वह किसी की जान लेने से भी नहीं चूकते। एक तो प्यार न मिलने पर उनको साथ न मिलने का डर बना रहता है तो वहीं जलन भी पैदा हो जाती है। वह धीरे-धीरे इस बीमारी से ग्रसित हो जाते हैं। उनके अंदर बस उसी का ख्याल चलता है और वक्त के साथ धीरे-धीरे वह एक जुनून बन जाता है। कुछ लोग जहां फिल्में और टीवी देखकर ऐसा करते हैं तो कुछ किताबों में पढ़कर इससे प्रभावित हो जाते हैं।
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डा. ज्ञानेंद्र कुमार
आचार्य एवं विभागाध्यक्ष
मनोरोग विभाग-मेडिकल कॉलेज

ये ध्यान रखें
- ऐसी समस्या आने पर परिजनाें से बात करें।
-  अपने आप को कभी अकेला न छोड़ें।
- संबंधों की समीक्षा कर चिकित्सक से मिलें।
- नकारात्मकता को छोड़कर आगे की तरफ बढ़ें।
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