अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। प्रदेश सरकार की ओर से बृहस्पतिवार को विधानसभा में राज्य का बजट पेश किया गया। इसे लेकर अमर उजाला की ओर से संवाद का आयोजन किया गया। इसमें अलग-अलग वर्ग के लोग शामिल हुए। उनकी ओर से बजट पर मिलीजुली प्रतिक्रिया आई। किसी ने कहा कि यह बजट प्रदेश के विकास को रफ्तार देने वाला है तो कोई बोला बजट में महंगाई पर अंकुश के कोई उपाय नहीं किए गए। आम आदमी को इससे कोई राहत नहीं मिलने वाली है।
संवाद में चार्टर्ड अकाउंटेंट निमेष खन्ना ने कहा कि बजट में सरकार ने आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (एआई) सेंटर की स्थापना का काम किया है। यह आज के समय की जरूरत है। इसके अलावा, प्रति व्यक्ति आय में इजाफा होना भी बड़ी बात है लेकिन खर्च में भी बढ़ोतरी हुई है। इस पर अंकुश की भी जरूरत है।
उप्र युवा उद्योग व्यापार मंडल के प्रदेश अध्यक्ष जितेंद्र सोनी ने कहा कि जीएसटी की जटिलताएं दूर करने के कोई उपाय नहीं किए गए हैं। व्यापारी जीएसटी के बोझ को ढो रहा है।
किसान नेता महेंद्र शर्मा ने कहा कि बजट से उम्मीद थी कि सरकार किसानों को लाइन और ट्रांसफार्मर में सब्सिडी देगी लेकिन सरकार ने निराश किया। इसके अलावा, गेहूं खरीद में बोनस की भी घोषणा नहीं की गई।
कर अधिवक्ता सुरेंद्र खरे ने कहा कि यह बजट पिछले से ज्यादा बेहतर है। शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में बजट में विशेष प्रावधान किए गए हैं।
कोच रविप्रकाश परिहार ने कहा कि सरकार स्टेडियम तो बना रही है, यह अच्छी बात है लेकिन स्टेडियम के साथ-साथ कोच और खेल उपकरणों की भी व्यवस्था की जानी चाहिए।
चार्टर्ड अकाउंटेंट उज्ज्वल मोदी ने कहा कि बजट के माध्यम से सरकार ने समाज के हर तबके को साधने की कोशिश की है। किसान हो या नौजवान, बजट में सभी वर्गों को कुछ न कुछ दिया गया है।
समाजसेवी शानू कंचन ने कहा कि बजट में महिलाओं के रोजगार पर फोकस करना चाहिए था। हालांकि, महिलाओं के लिए छात्रावास की घोषणा की गई है, जो स्वागतयोग्य है।
माधुरी अग्रवाल ने कहा कि बजट में आम आदमी के खर्चों में कटौती के लिए कोई प्रावधान नहीं किया गया है। प्राइवेट स्कूलों की फीस पर अंकुश लगाने के लिए भी कोई कदम नहीं उठाया गया है, जो निराशाजनक है।
बुंदेलखंड महाविद्यालय के शिक्षक डा. अरुण कुमार व डा. प्रशांत ने कहा कि महाविद्यालयों में एनईपी (नई शिक्षा नीति) के अनुरूप स्ट्रक्चर तैयार करने की भी जरूरत है। विशेषज्ञ शिक्षकों की तैनाती भी होनी है। बजट में इसके लिए व्यवस्था की जानी चाहिए थी।