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बीयू में बंट रहा किताबी ज्ञान, प्रयोगों से नहीं छात्रों की पहचान

Sat, 08 Oct 2016 12:32 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
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bu, jhansi news - फोटो : demo
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बुंदेलखंड विश्वविद्यालय में छात्रों को सिर्फ किताबी ज्ञान बांटा जा रहा है। संसाधनों की कमी के कारण प्रयोगशालाएं या तो ठप पड़ी हैं या है ही नहीं हैं। रसायन विज्ञान विभाग की दो लैब बंद हैं, जबकि पत्रकारिता विभाग में मीडिया लैब ही नहीं है।
यह कमियां अगले माह प्रस्तावित राष्ट्रीय मूल्यांकन एवं प्रत्यायन परिषद (नैक) की टीम के सर्वे में कुलपति का ए ग्रेड लेने का सपना टूट सकता है।
रसायन विज्ञान विभाग में चार लैब हैं। इन लैब के लिए एक अटेंडेंट और एक सहायक अटेंडेंट ही हैं। जबकि, हर लैब में एक-एक अटेेंडेंट और सहायक होना चाहिए। स्थिति यह है कि चार में तीन लैब काफी समय से बंद थी। तीन अक्तूबर को दो लैबों के उपकरण में गैस भरा दी थी, जिससे उनमें से एक तो चालू हो गई, लेकिन पानी की कमी के कारण दूसरी अब तक शुरू नहीं हो पाई है। दो लैब बंद होने के कारण छात्रों को नियमित प्रयोग करने का मौका नहीं मिल पा रहा है।
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पत्रकारिता विभाग का तो हाल और भी बुरा है। यहां प्रिंट मीडिया लैब में बीस कंप्यूटर हैं, परंतु इनमें क्वार्क एक्सप्रेस, फोटोशॉप व कोरल ड्रा जैसे महत्वपूर्ण साफ्टवेयर अपलोड नहीं होने के कारण छात्र न्यूज रूम के बेसिक कार्य नहीं सीख पा रहे हैं।
यहां इलेक्ट्रॉनिक मीडिया लैब और कैमरा भी नहीं है। हालांकि संसाधनों की कमी के बाद भी यहां के छात्र मासिक समाचार पत्र संवाद नियमित प्रकाशित कर रहे हैं।
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राष्ट्रीय मूल्यांकन एवं प्रत्यायन परिषद (नैक) की टीम क्लासों के साथ-साथ प्रयोगात्मक शिक्षा पर भी विशेष ध्यान देगी। ऐसे में बदहाल प्रयोगशालाओं के साथ नैक की टीम से ए ग्रेड मिलना मुश्किल दिख रहा है।

लैब अटेंडेंट की नियुक्ति व अन्य समस्याओं के संबंध में विश्वविद्यालय प्रशासन को जानकारी दे दी गई है।
धीरेंद्र शर्मा, समन्वयक रसायन विज्ञान विभाग

विश्वविद्यालय में मीडिया लैब के निर्माण का कार्य शुरू हुआ था। लेकिन, कतिपय कारणों से कार्य रुक गया है।
सीपी पैन्यूली, विभागाध्यक्ष पत्रकारिता विभाग

रसायन विज्ञान विभाग से लैब अटेंडेंट की नियुक्ति का प्रस्ताव नहीं मिला है। मीडिया लैब का निर्माण क्यों रुका है, इसकी जानकारी नहीं है।
व्यास नारायण सिंह, कुलसचिव
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