अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। बुंदेलखंड विश्वविद्यालय में 2011 में प्रोफेसर पद के लिए पात्र माने गए आवेदक को इस बार अपात्र करार दिया गया है। उन्होंने बीएड विभाग में आचार्य पद के लिए आवेदन किया था। आवेदक ने बीयू में चल रहीं नियुक्तियों में अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए राज्यपाल से जांच कराने की मांग की है।
सेंट्रल यूनिवर्सिटी कर्नाटका के फर्स्ट कोर्ट के पूर्व सदस्य डॉ. सुनील तिवारी ने भी बीएड विभाग में प्रोफेसर पद के लिए आवेदन किया है। संभावित एपीआई स्कोर में उनकी यूनिक आईडी के सामने दो आपत्तियां अंकित थीं। उनका कहना है कि निर्धारित समय 31 जनवरी तक उन्होंने आपत्तियों का निस्तारण कर दिया। मगर उसे देखे बगैर ही कमेटी ने 30 एपीआई अंकित कर उन्हें अपात्र घोषित कर दिया। सोमवार को उन्होंने मामले की शिकायत राज्यपाल से की है। कहा है कि 2011 में भी उन्होंने बीयू के बीएड विभाग में आवेदन किया था, तब प्रोफेसर पद के लिए उन्हें पात्र माना गया और साक्षात्कार के लिए कॉल लेटर भी जारी किए गए। सवाल उठाया कि जो व्यक्ति 12 साल पहले प्रोफेसर पद के लिए पात्र था, उसे अब अपात्र कैसे घोषित किया गया। जबकि, समय बढ़ने के साथ अनुभव और अन्य योग्यताएं बढ़ती हैं। कहा कि विश्वविद्यालीय परिनियमावली के अनुसार प्रोफेसर पद की एपीआई स्कोर की गणना करने के लिए आचार्य पद का ही व्यक्ति होना चाहिए। उनकी एपीआई स्कोर की गणना करने वाले चार शिक्षक प्रोफेसर पद से नीचे हैं। आरोप लगाया कि बीयू में चल रहीं नियुक्तियां शुरू से ही अनियमितताओं के घेरे में हैं। इसलिए विश्वविद्यालय के इतर अन्य एजेंसी से इस मामले की जांच कराई जाए।
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अभी शिकायती पत्र प्राप्त नहीं हुआ है। शिकायत मिलने पर परीक्षण कराया जाएगा। - विनय कुमार सिंह, कुलसचिव, बीयू।