फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

बीयू : तीन बार निलंबन, फिर बहाली

विज्ञापन
विज्ञापन
तैनाती के 20वें माह से शुरू हुआ निलंबन-बहाली का सिलसिला
विज्ञापन


आरोप सिद्ध न होने पर कार्य परिषद ने रोके भत्ते जारी करने के दिए थे आदेश

अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के अवर अभियंता अम्बरीश गौतम की तैनाती के 20वें माह से निलंबन और बहाली का सिलसिला शुरू हो गया। उन्हें तीन बार निलंबित और बहाल किया गया था। आरोप सिद्ध न होने पर कार्य परिषद ने रोके गए जीवन निर्वाह भत्तों के भुगतान का आदेश दिया था।
बीयू के रिकॉर्ड के अनुसार, अम्बरीश की तैनाती 11 दिसंबर 2000 को हुई थी। इसके बाद दायित्वों का निर्वहन न करने एवं कार्य के प्रति उपेक्षित रहने के आरोप में 21 अगस्त 2002 को निलंबित कर दिया गया था। 59 दिन बाद यानी 19 अक्तूबर 2002 को चेतावनी के साथ बहाल कर दिया गया। 29 जनवरी 2005 में बिना सूचना के अनुपस्थित होने के कारण निलंबित किया गया। 42 दिन बाद यानी 18 मार्च 2005 को बिना अनुमति मुख्यालय न छोड़ने की चेतावनी के साथ बहाली की गई। इसके बाद, बिना सूचना कार्यालय में अनुपस्थित रहने, कार्यों की उपेक्षा, निर्माण में गलत माप करके अत्यधिक धनराशि का कार्य दिखाने, सक्षम अधिकारी के फर्जी हस्ताक्षर बनाकर कार्यादेश जारी करने, बिना स्वीकृति के अवकाश पर चले जाने के आरोप में सात अक्तूबर 2008 में फिर निलंबित कर दिया गया। चार नवंबर 2008 में आरोप पत्र जारी किया गया। इस पर अम्बरीश ने 28 अगस्त 2010 में जांच अधिकारी उप कुलसचिव को उत्तर दिया। 20 जनवरी 2011 में उप कुलसचिव ने जांच आख्या दी। सात अक्तूबर 2013 को हुई कार्य परिषद की बैठक में जांच कमेटी की रिपोर्ट रखी गई, जिसमें अभिलेखों के अभाव में गलत पैमाइश का आरोप सिद्ध नहीं हुआ। इसके बाद रोके गए भत्तों के भुगतान का आदेश किया गया।
विज्ञापन



शिकायत की तो 1.28 लाख की हानि का दोषी ठहरा दिया, किया बर्खास्त
झांसी। जेई अम्बरीश के निलंबन और बर्खास्तगी की वजह अधिकारियों की शिकायत करना रहा। जब कानूनी नोटिस की बात कही तो जांच कमेटी गठित कर उसे ही 1.28 लाख रुपये की हानि का दोषी ठहरा दिया गया।
बीयू के दस्तावेज के अनुसार, जेई अम्बरीश ने विवि के आवासों की सात छतों की मरम्मत की शिकायत की। इस पर 20 जनवरी 2021 में तत्कालीन कुलसचिव ने स्पष्टीकरण मांग लिया। 22 जनवरी 2021 में जवाब दिया, जिसमें कुलसचिव पर ही जेई ने आरोप लगाते हुए कार्रवाई की मांग की। कार्रवाई न होने पर कानूनी नोटिस देने की बात कही। इस पर कुलपति ने जांच समिति (तकनीकी) का गठन किया। जांच समिति ने अफसरों के इशारे पर जेई पर ही अनियमितता सिद्ध कर दिया। यही नहीं, फर्जी और काल्पनिक मापों के आधार पर विवि को 1,28,647 रुपये हानि पहुंचाने का दोषी ठहरा दिया। कुलपति ने जांच समिति गठित कर दी। पांच अगस्त 2021 को अम्बरीश से अभिलेख के साथ 15 दिन में जवाब मांगा गया। उन्होंने सात सितंबर 2021 को जांच अधिकारी, कुलपति और कुलसचिव पर आरोप लगाए। इस संबंध में बीयू प्रशासन ने अम्बरीश से सात अक्तूबर 2021 को स्पष्टीकरण मांगा, लेकिन उन्होंने जवाब नहीं दिया। जांच समिति ने 25 अक्तूबर 2021 को रिपोर्ट सौंपकर उन्हें अवमानना का दोषी पाया। इसके बाद, कुलपति ने बर्खास्त कर दिया था।
विज्ञापन

इसके बाद अम्बरीश से पत्रावलियां बीयू प्रशासन को नहीं सौंपा। समिति के सामने कक्ष और अलमारियों का ताला खोला गया, लेकिन पत्रावलियां नहीं मिलीं। 23 दिसंबर 2021 को कार्य परिषद की बैठक में अम्बरीश ने अपील प्रस्तुत की। निर्णय हुआ जब वह पत्रावलियां सौंपेंगे, तब कार्यवाही शुरू होगी।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें