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फर्जी मार्कशीट और डिग्री बनाने में बीयू के छह कर्मचारी निलंबित

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झांसी। बुंदेलखंड विश्वविद्यालय ने फर्जी मार्कशीट और डिग्री बनाने में छह कर्मचारियों को निलंबित कर दिया है। साथ ही तीन कर्मचारियों के पटल भी बदल दिए हैं। निलंबित कर्मचारियों की सजा तय करने के लिए तीन सदस्यीय कमेटी का भी गठन हो गया है। कमेटी के रिपोर्ट के आधार पर बीयू आगे की कार्रवाई करेगा।
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बीयू में फर्जी मार्कशीट और डिग्री बनाने का मामला इसी महीने सामने आया था। बीयू की ओर से जिस छात्र के कागजात फर्जी होने की सत्यापन रिपोर्ट बार काउंसिल ऑफ इंडिया को 2020 में भेजी गई थी। बाद में उसी छात्र की फर्जी डुप्लीकेट मार्कशीट और डिग्री बीयू के कर्मचारियों ने पैसे लेकर बना दी। फिर बीसीआई की ओर से दोबारा सत्यापन कराया गया तो सहायक कुलसचिव परीक्षा दिनेश कुमार ने मामले को पकड़ लिया। इसकी जानकारी उन्होंने अधिकारियों को दी। बीयू की ओर से चार सदस्यीय जांच समिति का गठन किया गया। कुलसचिव विनय कुमार सिंह ने बताया कि जांच रिपोर्ट के बाद अति गोपनीय विभाग में तैनात वरिष्ठ सहायक महेश चंद्र, गोपनीय एसएफएस विभाग के प्रधान सहायक राघवेंद्र सिंह यादव, गोपनीय अभिलेख विभाग का नैत्यिक सहायक मुकेश कर्दम व राजेंद्र सिंह, नैत्यिक सहायक जितेंद्र सिंह और विधि संस्थान का चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी राम सिंह को निलंबित कर दिया है। कमेटी ने इन सभी की फर्जी मार्कशीट, डिग्री बनाने में संलिप्तता पाई है। अब फाइनल जांच कराई जाएगी। इसके लिए भी तीन सदस्यीय कमेटी गठित कर दी गई है। अब सभी निलंबित कर्मचारियों को चार्जशीट जारी की जाएगी। फाइनल रिपोर्ट आने के बाद कर्मचारियों के खिलाफ दंड तय किया जाएगा। वहीं, बाबू कैलाश राजपूत, चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी भारत और पंकज साहू का गैर संवेदनशील विभाग में तबादला कर दिया गया है। हालांकि, इन तीनों कर्मचारियों की फर्जी मार्कशीट बनाने में संलिप्तता नहीं मिली है।
कई कर्मचारियों पर लटकी बर्खास्तगी की तलवार
बीयू में फर्जी मार्कशीट और डिग्री बनाने में कई कर्मचारियों पर बर्खास्तगी की तलवार लटकी हुई है। बताया गया कि जांच समिति के सामने प्रारंभिक जांच में चार्ट में कटिंग करने से लेकर इस फर्जीवाड़े में सीधे तौर पर शामिल कई कर्मचारियों के प्रमाण हाथ लग गए हैं।
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छात्र के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की
फर्जी मार्कशीट बनाने के प्रकरण में बीयू ने कर्मचारियों के खिलाफ तो कार्रवाई कर दी है। मगर जिस छात्र ने इस मार्कशीट को बनवाया है, उसके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की है। जानकारों का कहना है कि इस मामले में बीयू आरोपी छात्र के खिलाफ एफआईआर दर्ज करा सकता है।
अमर उजाला ने प्रमुखता से उठाया मुद्दा
फर्जी मार्कशीट और डिग्री बनाने के प्रकरण को अमर उजाला ने उजागर किया था। इसको लेकर सिलसिलेवार खबरें प्रकाशित कीं। मामला राजभवन तक पहुंचा। इसके बाद बीयू ने जांच समिति गठित कर जल्द से जल्द रिपोर्ट देने को कहा। महज तीन सप्ताह में ही जांच पूरी हो गई।
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