झांसी। बुंदेलखंड विश्वविद्यालय में 70 करोड़ का घोटाला खोलने का दावा करने वाले जेई अब खुद आरोपों में घिर गए हैं। बीयू प्रशासन ने उन्हें निलंबित भी कर दिया है। उन पर बिना आदेश के 59 लाख रुपये का काम कराने का भी आरोप है। वहीं, जेई का कहना है कि घोटाला खोलने पर उन्हें बेवजह फंसाया जा रहा है।
बीयू के अवर अभियंता अंबरीश गौतम ने अधिकारी, कर्मचारियों पर घोटाले के कई गंभीर आरोप लगाते हुए विजलेंस में शिकायत की थी। इस मामले में विजलेंस जांच चल रही है। जेई ने दावा किया है कि बीयू में 70 करोड़ रुपये का घोटाला हुआ है। जांच में कुछ लोग दोषी भी मिल गए हैं। 23 जुलाई को विजलेंस टीम जांच के लिए बुंदेलखंड यूनिवर्सिटी भी आएगी। वहीं, अब खुद जेई वित्तीय अनियमितता के आरोपों में घिर गए हैं। कुलसचिव नारायण प्रसाद का कहना है कि जेई ने नौ फर्मों से खुद के मौखिक आदेश के जरिए 59,06,814 रुपये का काम करा दिया। इन सभी की सूचना, पत्रावलियां मांगी गई तो सहायक कुलसचिव प्रशासन को उपलब्ध नहीं कराईं। वित्तीय एवं प्रशासनिक स्वीकृति के बगैर काम कराना अनियमितता की श्रेणी में आता है। इन सब मामलों पर जेई का निलंबन किया गया है। झलकारी बाई महिला छात्रावास और आईटीएचएम में टॉयलेट तुड़वा दिए गए। जब आदेश मांगा गया तो कोई संतोषजनक उत्तर नहीं दे सके। हालांकि, जेई का कहना है कि कोई काम बिना टेंडर, स्वीकृति के नहीं कराया। उन्होंने रिश्वत मांगे जाने का आरोप लगाया।